उच्चतम न्यायालय का निर्णय

वॉशिंग्टन (अमरीका) – अमरीका के उच्चतम न्यायालय ने गर्भपात को संवैधानिक अधिकार देने वाला अपना ५० वर्ष पुराना निर्णय रहित किया । वर्ष १९७३ में उच्चतम न्यायालय ने गर्भपात की एक घटना में ‘गर्भपात करना है अथवा नहीं, यह निर्णय लेने का अधिकार महिला का है’, ऐसे कहा था । उच्चतम न्यायालय के अब दिए निर्णय के कारण महिलाओं का गर्भपात का अधिकार रहित हुआ है । इस निर्णय के कारण राज्य गर्भपात की प्रक्रिया पर प्रतिबन्ध लगा सकेंगे । ५० में से २६ राज्य अब गर्भपात के विषय में नये निर्बन्ध लागू कर सकेंगे अथवा उस पर बंदी ला सकेंगे, ऐसा कहा जा रहा है । इन २६ में से १३ राज्यों में गर्भपात पर निर्बन्ध लागू हुए हैं । गर्भपात कानून रहित करने के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय का प्रारूप २ मास पूर्व फूटने के कारण (लीक होने के कारण) अमरीका में खलबली मच गई थी । इस संभावित निर्णय के कारण महिलाओं ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए थे ।
१. उच्चतम न्यायालय में ‘डॉब्स विरुद्ध जॅक्सन’ महिला आरोग्य संगठन के मुकदमे पर सुनवाई चालू थी । उसमें मिसिसिपी राज्य ने महिला के गर्भवती होने के १५ सप्ताह बाद होने वाले गर्भपात पर बंदी को चुनौती दी गई थी । न्यायालय ने मिसिसिपी राज्य के पक्ष में निर्णय देकर महिलाओं का संवैधानिक अधिकार समाप्त किया ।
२. ‘प्लँड पेरेन्टहूड’ (नियोजित पालकत्व) नामक आरोग्यसेवा संस्था के आकडों के अनुसार, वर्तमान में प्रजननक्षम आयु की लगभग साढे तीन करोड से अधिक महिलाओं का गर्भपात का अधिकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय के कारण समाप्त हुआ है । ९० प्रतिशत से अधिक गर्भपात गर्भावस्था के पहले १३ सप्ताहों में होते हैं तथा आधे से अधिक गर्भपात गोलियों से किए जाते हैं ।
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