परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार
अनेक से एक की ओर जाना हिन्दू धर्म सिखाता है। इसके विपरीत, ‘विविधता भारत का बल है’, ऐसा अनेक राजनीतिक नेता कहते हैं ! विविधता के कारण ही आज भारत की परम अधोगति हुई है !’

शिक्षासम्राट (?)
‘क्या किसी भी शिक्षा-सम्राट ने ऋषि-मुनियों के समान शिक्षा क्षेत्र में कार्य किया है ? आज के शिक्षा-सम्राट शिक्षा के माध्यम से केवल अधिकाधिक पैसे अर्जित करनेवाले सम्राट हैं !’
आंतरिक तथा बाह्य शत्रुओं से घिरा हुआ भारत !
‘अन्य देशों में आंतरिक शत्रु नहीं होते ! भारत में आंतरिक और बाह्य, दोनों प्रकार के शत्रु हैं। इस प्रकार के शत्रु रखनेवाला एकमात्र देश भारत ही है ! भारतीयों के लिए यह अत्यंत लज्जाजनक है !’
राष्ट्र एवं धर्म प्रेम !
व्यक्तिगत प्रेम की अपेक्षा राष्ट्रप्रेम और धर्मप्रेम करके देखिए, उसमें अधिक आनंद है !’
– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?