
‘कुछ आध्यात्मिक संस्थाएं अथवा संप्रदाय कोई अभियान अथवा कार्यक्रम करने पर ‘हमने यह किया, हमने वह किया’, ऐसा बताते हुए दिखाई देते हैं; परंतु सनातन में सभी कार्य महर्षि, संत आदि के अर्थात भगवान के मार्गदर्शन अनुसार किया जाता है । इसलिए ‘सनातन प्रभात’ में ‘… की आज्ञानुसार किया गया’, ऐसा उल्लेख किया जाता है । स्वयं कर्तापन न लेने के लिए नहीं, अपितु वह वस्तुस्थिति होने से ऐसा किया जाता है । इसका दूसरा पहलू यह है कि स्वयं की महानता दिखाने हेतु प्रयास न होने से ‘स्वयं ने कुछ नहीं किया’, ऐसी हीन भावना भी मन में नहीं रहती, इसके विपरीत आज्ञापालन करने का आनंद प्राप्त होता है । सनातन संस्था द्वारा चलाए गए कुछ उपक्रमों का उल्लेख कुछ समाचारों में किया जाता है । वह इसलिए कि ऐसे उपक्रमों के माध्यम से भी साधना कर सकते हैं, इसका उदाहरण समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का वह एक माध्यम है ।’
– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
(और इनकी सुनिए…) ‘कुंकुम इस्लामी देशों से आता है, तो क्या फिर हिन्दु तिलक लगाना बंद कर देंगे ?’ – Priyank Kharge
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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