परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा वर्णित संकटकाल की भयावहता !

‘तीसरा विश्वयुद्ध अत्यंत भीषण होगा । इसमें भारत फंसेगा । परमाणु बम से अत्यधिक संहार होगा । गांव-के-गांव उजड जाएंगे । तीसरे विश्वयुद्ध के कारण पृथ्वी पर रज-तम (प्रदूषण) बहुत बढेगा । इसलिए इस विश्वयुद्ध के पश्चात संपूर्ण पृथ्वी पर सात्त्विकता बढाने के लिए पृथ्वी को शुद्ध करना पडेगा । उसके लिए अनेक संत बनने आवश्यक हैं । यह कार्य होने के लिए साधक अभी से अपनी साधना बढाने पर ध्यान केंद्रित करें ।’
– (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?