पूर्वप्रभावी कर के द्वारा कंपनी से भारत द्वारा लिए धन को वापस न करने का मामला

पेरिस (फ्रान्स) – ‘केर्न एनर्जी’ नामक ब्रिटेन की कंपनी ने भारत के विरोध में फ्रांस में प्रविष्ट किया मुकदमा जीत लिया है । इस कारण फ्रांस के न्यायालय ने भारत की पेरिस में रणनीतिक स्थान की २० संपत्तियोें को अपने अधिकार में लेने का आदेश इस कंपनी को दिया है । प्रत्येक संपत्ति की अनुमानित राशि १७६ करोड रुपए है । ‘फ्रेंच न्यायालय का आदेश मिला नहीं है । यह आदेश हाथ में आने के बाद ही योग्य और कानूनी उपाय किए जाएंगे,’ ऐसा भारत के अर्थ मंत्रालय की ओर से बताया गया है ।
The #CairnEnergy dispute with India over the settlement of a $1.2 billion award from The Hague, took a dramatic turn, with the company saying it had secured a French court order allowing it to freeze at least 20 Indian properties in Central Paris.https://t.co/OYASSKPtPU
— The Hindu (@the_hindu) July 8, 2021
१. भारत सरकार ने ‘केर्न एनर्जी’ कंपनी की ओर से १० सहस्र २४७ करोड रुपए पूर्वप्रभावी कर (पिछले दिनांक से अभी तक वसूल किया गया कर) लिया था । साथ ही ब्याज तथा उनके द्वारा कंपनी की पूर्वरचना करने के कारण दंड भी लगाया था ।
२. इसके विरोध में ‘केर्न एनर्जी’ ने इसे अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता में चुनौती दी थी । ३ सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता समिति ने (इसमें एक भारतीय न्यायाधीश थे) पिछले वर्ष दिसंबर माह में ‘केर्न’ पर पूर्व प्रभाव से लगाए गए कर का निर्णय रद्द किया और डिविडेंड और कर वापस करने के लिए भारत को बताया ।
३. भारत ने इस आदेश को नहीं माना । इस कारण ‘केर्न’ ने भारत से रकम वसूल करने के लिए विविध देशों में याचिका प्रविष्ट की । उसमें से फ्रांस के एक न्यायालय ने केर्न कंपनी को भारत सरकार से भरपाई के तौर पर मांगी गई रकम वसूली का एक भाग पेरिस में भारत सरकार की २० संपत्तियों को अधिकार में लेकर वसूलने का आदेश दिया ।
US-Iran War : अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त होगा !
क्या बांग्लादेश सरकार बांग्लादेश को ‘हिन्दूमुक्त’ राष्ट्र बनाने का प्रयास करनेवालों की सहायता कर रही है ? – Salah Uddin Shoaib Choudhury
भारतीय नाविकों की मृत्यु के बाद भारत तथा अमेरिका के बीच तनाव
ईरान ने अमेरिका के हाथ न लगने हेतु छिपाया ५०० किलो यूरेनियम भण्डार !
US-Iran Peace Deal : शान्ति समझौते के विरोध में ईरानी नागरिक सडकों पर !
हमारी स्वतंत्र विदेशनीति नहीं है, परंतु संवाद के मार्ग खुले रखे जाएं ।- RSS Chief Mohan Bhagwat