
नई देहली – देहली उच्च न्यायालय में ट्विटर ने स्वीकार किया है कि, उसने सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून का पालन नहीं किया है । इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अब हम ट्विटर को कोई सुरक्षा नहीं दे सकते । सरकार ट्विटर पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है । सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के लागू होने के पश्चात शिकायत अधिकारी की नियुक्ति नहीं करने के लिए अमित आचार्य ने ट्विटर के विरुद्धउच्च न्यायालय में एक याचिका प्रविष्ट की थी । इस पर हुई सुनवाई में न्यायालय ने यह निर्णय दिया ।न्यायालय ने शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति करने के लिए ट्विटर को ८ जुलाई की समय सीमा भी दी है इस दिनांक तक न्यायालय को यह बताना होगा कि किस भारतीय की इस पद पर नियुक्ति की गई है ।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के नियमों का पालन करने के लिए ट्विटर को इसके पूर्व ही तीन माहकी अवधि दी गई थी; परंतु उन्होंने इसका पालन नहीं किया तथा अब और दो सप्ताह का समय मांगा है । ट्विटर के अधिवक्ताओं ने कहा, ‘हमारे प्रतिष्ठान का मुख्यालय अमेरिका में है ।इसलिए हमें विलंब हो रहा है ।’ इस पर न्यायालय ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा, ‘आपको अध्ययन करके आना चाहिए, अन्यथा आप संकट में आ सकते हैं । प्रक्रिया पूर्ण करने में आपको कितना समय लगता है ? ट्विटर को लगता है कि, वह हमारे देश में उसके चाहे जितना समय ले सकता है । हम इसकी अनुमति नहीं दे सकते ।’
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