एम्बुलेंस के चालक द्वारा ३५ सहस्त्र रुपए मांगने पर असहाय पिता की कृति !
- बार-बार शिकायत करने के उपरांत भी इस तरह की घटनाओं को रोकने में सक्षम नहीं होना सरकारी एजेंसियों के लिए लज्जा की बात है ! इस प्रकार का अमानवीय व्यवहार करने वालों को कारागृह में ही डालना चाहिए !
- ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार राष्ट्रीय स्तर पर एम्बुलेंस चालकों का फीस क्यों नहीं निर्धारित कर देती ?
कोटा (राजस्थान) : एक एम्बुलेंस चालक ने एक युवती का मृतदेह घर ले जाने के लिए ३५ सहस्त्र रुपये की मांग की । इसलिए, उस मृत बच्ची के पिता को अपनी गाडी में ‘सीट बेल्ट’ से बांधकर उसका मृतदेह ले जाना पडा । यह चौंकाने वाली घटना सामने आई है । इस घटना का एक वीडियो सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित हुआ है ।
इस संदर्भ में मृतक के मामा मधु राजा ने प्रसार माध्यमों को बताया कि उनकी ३४ वर्षीय भांजी की मृत्यु कोरोना के कारण हुई । तदुपरांत ‘वार्ड बॉय’ से लेकर एम्बुलेंस चालक तक सभी ने हमसे पैसे की मांग की । ‘वार्ड बॉय’ ने भांजी के शव को ‘स्ट्रेचर’ से एम्बुलेंस तक ले जाने के लिए १ सहस्त्र रुपए मांगे । जैसे तैसे मृतदेह एंबुलेंस तक ले जाने के पश्चात विभिन्न एम्बुलेंस के चालकों ने मृतदेह को उसके घर ले जाने के लिए १८ सहस्त्र से ३५ सहस्त्र रुपये की मांग की । तत्पश्चात्, युवती के पिता ने उसका मृत देह गाडी के सीट पर रख दिया तथा उसे ‘सीट बेल्ट’ से बांध कर घर ले गए । उनकी बेटी का विवाह हो चुका है तथा उसका एक पुत्र भी है ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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