वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा कनिष्ट पुलिस अधिकारियों से घरेलू नौकर जैसा व्यवहार करना आम बात है । इसकी जांच कर पुलिस बल में आवश्यक बदलाव करना अनिवार्य है !
यदि संबंधित पुलिस द्वारा दर्ज की गई शिकायत में तथ्य है, तो क्या पुलिस अधिकारी उनके द्वारा दी गई शिकायत पर ध्यान देंगे और संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी ?
धमतरी (छत्तीसगढ) – उज्ज्वल दीवान ने पुलिस अधीक्षक (एस.पी.) को अपना इस्तीफा सौंपते हुए आरोप लगाया है कि, ‘वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घर के बर्तन धुलवाते हैं, माली काम करवाते हैं और अडचन की बात की तो अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हैं ।’ उज्जवल दीवान ने उत्पीडन को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया है ।
उज्ज्वल दीवान द्वारा प्रस्तुत एक बयान में उन्होंने कहा कि, अपने वरिष्ठों के साथ इस मुद्दे को उठाने से पुराने पुलिस अधिनियम का हवाला देकर उन्हें गालीगलौच की जाती है । यदि वे अपने अधिकारों के बारे में बात करते हैं और शिकायत करते हैं तो उन्हें ही नोटिस दे दी जाती है एवं उन्हें बिना किसी जांच के निलंबित करने की घटनाएं आम हैं । “कोरोना संक्रमण के कारण एक दिन की पगार में कटौती न करने के लिए सरकार को शिकायत की इसलिए मेरा नक्सल प्रभावित क्षेत्र मेचका में स्थानांतरण कर दिया गया। मैं वहाँ जाने के लिए तैयार था; लेकिन मुझे वहां जाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया”, दीवान ने एक बयान में कहा । उज्जवल दीवान पिछले ११ वर्षों से पुलिस बल में कार्यरत हैं । यद्यपि उनके इस्तीफे को पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वीकार कर लिया गया था तथापि यह पता चला है कि उसका अनुमोदन नहीं किया है ।
“इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उज्जवल दीवान को प्रशासनिक आदेश के अनुसार स्थानांतरित किया गया, किन्तु वे वहां नहीं गए । उन्होंने न जाने के कई कारण बताए । एक पुलिस अधिकारी के लिए यह शोभनीय व्यवहार नहीं है”, सहायक पुलिस अधीक्षक मनीषा ठाकुर ने कहा ।
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