सरकारी कार्यालय की अक्षम्य चूक ! सैनिक देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देते हैं ; परंतु सरकारी कर्मचारियों की इसके प्रति कोई सहानुभूति नहीं है, यह लज्जास्पद है ! ऐसी गलतियां करने वालों को कठोर दंड देना चाहिए !

नई दिल्ली : यह बात सामने आई है कि, शहीद हुए सैनिक गगन सिंह की पत्नी को ६९ वर्षों के पश्चात पेंशन मिली है । १९५२ में गगन सिंह सेवारत थे, तब वे शहीद हुए थे । उनकी पत्नी परुली देवी को अपने पति की मृत्यु के पश्चात पेंशन प्राप्त होनी चाहिए थी ; परंतु, यह प्राप्त नहीं हुई थी । भारतीय सेना ने भी इसकी ओर ध्यान नहीं दिया । ( भारतीय सेना से ऐसी असंवेदनशीलता की अपेक्षा नहीं है ! – संपादक ) । सेवानिवृत्त अधिकारी डी.एस. भंडारी ने पहल की तथा उनके प्रयास सफल रहे । लगभग ६९ वर्षों के पश्चात,परुली देवी को पेंशन मिली । भंडारी के अनुसार, परुली देवी को १९७७ से लेकर ४४ वर्षों की अनुमानित २० लाख रुपये की शेष (एरियर) पेन्शन राशि मिलेगी ।
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शनिशिंगणापुर स्थित श्री शनिदेव की मूर्ति के संवर्धन हेतु वज्रलेपन किया जाएगा ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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