भारत में राजनेताओं के संदर्भ में ऐसा ‘चमत्कार’ हमेशा से होता रहा है और जनता भी यही आशा करती है ! ऐसा न होना ही आश्चर्यजनक है ! ऐसे ‘चमत्कारों’ को रोकने के लिए धर्माधिष्ठित राज्य प्रणाली की आवश्यकता है !

कोलकाता (बंगाल) – एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ए.डी.आर.) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक की संपत्ति पांच वर्षों में १९८५ प्रतिशत बढी है । तृणमूल कांग्रेस की विधायक ज्योत्सना मंडी द्वारा चुनाव आयोग में सादर शपथपत्र के अनुसार, २०१६ में उनकी कुल संपत्ति १ लाख ९६ हजार ६३३ रुपये थी । वर्ष २०२१ में, यह संपत्ति ३९ लाख ४ हजार ५११ रुपए बढी और ४१ लाख १ हजार १४४ तक पहुंच गई ।
२७ मार्च को विधानसभा चुनाव के पहले चरण में ३० उम्मीदवारों के शपथपत्रों का संयुक्त सर्वेक्षण किया गया था । संदीप कुमार मुखर्जी, जिन्होंने २०१६ में कांग्रेस के टिकट पर पुरुलिया से चुनाव लडा था और वर्तमान में भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उनकी संपत्ति में २८८.८६ प्रतिशत की वृद्धि हुई है । मुखर्जी ने पांच साल पहले कहा था कि, उनकी कुल संपत्ति ११.५७ लाख रुपये है । यह धन २०२१ में बढकर ४५ लाख २ हजार ७८२ हो गया है । कई उम्मीदवारों के संपत्ति में भारी वृद्धि सामने आई ।
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