यदि इस तरह का बयान हिन्दुओं के शंकराचार्य ने दिया होता, तो सभी धर्मनिरपेक्षतावादी पुरो (अधो) गामी लोगों ने उन्हें ‘सनातनी’ कहकर दुतकार दिया होता ; किंतु, जब वैटिकन चर्च ने समलैंगिक विवाह का विरोध किया, तो हर कोई चुप है !

वेटिकन सिटी – ‘समलैंगिक लोगों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए ; किंतु, इस प्रकार के विवाहों को आशिर्वाद नहीं दिया जा सकता, क्योंकि ईश्वर के अनुसार, विवाह एक पुरुष और एक महिला का आजीवन स्वेच्छा से एक साथ रहने की एक पद्धति है । यही कारण है कि भगवान समलैंगिक विवाह जैसी “बुरी चीजों” को आशीर्वाद नहीं देते हैं’ ; यह वैटिकन चर्च ने स्पष्ट कर दिया है ।
The Vatican has decreed that the Catholic Church cannot bless same-sex unions, which could give the impression of a sacramental equivalence to marriage, but supports churches in welcoming and blessing gay people. https://t.co/oIeSMobtfT
— The Christian Science Monitor (@csmonitor) March 16, 2021
वेटिकन ने इस प्रश्न का उत्तर देते हुए स्पष्ट किया, “क्या कैथोलिक चर्च से संबंधित महिला पादरी समलैंगिक विवाह में सम्मिलित होकर जोडों को आशीर्वाद दे सकतीं हैं ?” इस संबंध में दो पृष्ठों का एक स्पष्टीकरण दिया गया है । चर्च ने स्पष्ट कर दिया है कि इसमें पोप फ्रांसिस की सहमति है । इसका सात अलग-अलग भाषाओं में अनुवाद किया गया है ।
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