हिन्दुत्वनिष्ठों की मांग का परिणाम !

बेळगांव (कर्नाटक) – जनपद के १६ मंदिरों पर प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लेते हुए धर्मादाय आयुक्त ने उन मंदिरों को नोटिस भेजे थे । इस अन्यायकारी आदेश को धर्मादाय आयुक्त मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी ने अगला आदेश मिलने तक स्थगित रखने के लिए कहा है । मंदिरों पर प्रशासकीय नियुक्ति के अन्यायकारी निर्णय का बेळगांव के समस्त मंदिर न्यासी, देवस्थान और धार्मिक संस्था महासंघ, श्री शिवप्रतिष्ठान हिन्दुस्थान, श्रीराम सेना हिन्दुस्थान सहित विविध हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने तीव्र विरोध किया था । ‘आनेवाले १५ दिनों में बेलगांव के मंदिरों पर प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय पीछे न लेने पर हम राज्यव्यापी आंदोलन छेडेंगे’, ऐसी चेतावनी भी महासंघ के कर्नाटक के प्रवक्ता ने श्री. गुरुप्रसाद गौडा ने पत्रकार परिषद में दी थी ।
भाजपा के विधायक अनिल बेनके और विधायक अभय पाटील ने भी ५ मार्च को जनपदाधिकारी एम.जी. हिरेमठ
और धर्मादाय आयुक्त मंत्री कोटा श्रीनिवास पुजारी से भेंट कर निवेदन दिया और निर्णय पीछे लेने हेतु कहा । उसके पश्चात समस्त हिन्दुत्व -निष्ठों द्वारा किए गए तीव्र विरोध को देखते हुए १६ मंदिरों पर प्रशासकीय नियुक्ति का आदेश स्थगित किया है । विधायक अनिल बेनके ने कहा कि ‘मंदिरों पर किसी प्रकार की नियुक्ति हम सहन नहीं करेंगे ।’ (७.३.२०२१)
मंदिर सरकारीकरण का आदेश निरस्त किए जाने तक संघर्ष चलता ही रहेगा ! – गुरुप्रसाद गौडा‘‘सरकार द्वारा मंदिरों पर प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय स्थगित करना स्वागत योग्य है । ऐसा होते हुए भी मंदिर सरकारीकरण का आदेश निरस्त होने तक और कर्नाटक सरकार द्वारा नियंत्रित ३२ सहस्र मंदिर मुक्त होने तक यह संघर्ष चलता ही रहेगा’’, ऐसा वक्तव्य ‘देवस्थान और धार्मिक संस्था महासंघ, कर्नाटक’ के प्रवक्ता |
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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