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उत्तर प्रदेश में, जहां हिन्दू देवी-देवताओं का इस प्रकार अपमान किया जा रहा है, सरकार को उन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए, जो सूचना मिलने के उपरांत भी निष्क्रिय रहते हैं !

भदोही – यहां के सुरियावां क्षेत्र में अनेक वर्षों से ‘शंकर पार्वती छाप बीडी’ बीडी का उत्पादन किया जा रहा है । इस उत्पाद के पैकेट पर शंकर एवं पार्वती का चित्र भी छापा गया है । अनेक लोग इस बीडी का उपयोग कर, उसके आवरण (पैकेट्स) नालियों तथा कचरे में फेंक देते हैं । इससे देवता का अपमान किया जा रहा था, इसलिए धर्मप्रेमी शिव यादव ने पुलिस थाने में इसकी सूचना दी थी । क्योंकि इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी, इस संबंध में सूचना अधिकार के अंतर्गत सूचना मांगी गई थी । इसमें बीडी निर्माता विनय चौरसिया द्वारा इस नाम से ३० वर्ष पूर्व पंजीकरण किया गया था । इसलिए उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है’, ऐसा बताया गया ।
(पुलिस से अपेक्षा थी कि वे आगे बढकर एवं इस संबंध में कार्रवाई करे । वे ऐसा क्यों नहीं कर रहे, उन्हें इसका उत्तर देना चाहिए ! यदि अन्य धर्मियों के श्रद्धास्रोत का अपमान किया गया होता, तो क्या पुलिस ऐसी ही भूमिका अपनाती ? – संपादक) यह सूचना प्राप्त होने पर, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अनय श्रीवास्तव ने राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास परिवाद प्रविष्ट किया तथा उत्पाद पर शंकर एवं और पार्वती के चित्रों का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की ।
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