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नई देहली : तमिलनाडु के मंदिरों की विकट स्थिति पर यूनेस्को इसके पूर्व ही चिंता व्यक्त कर चुका है । वर्ष २०२० के जुलाई मास में, तमिलनाडु सरकार ने स्वयं मद्रास उच्च न्यायालय को बताया कि राज्य में ११ सहस्र (हजार) ९९९ ऐसे मंदिर हैं, जहां वित्तीय संकट के कारण वर्ष में एक बार भी पूजा नहीं की जा रही है । ३४ सहस्र ऐसे मंदिर हैं, जहां वार्षिक आय १० सहस्र रुपए से भी अल्प है । इसके अतिरिक्त, ३७ सहस्र मंदिरों में पूजा, रखरखाव, सुरक्षा तथा स्वच्छता का दायित्व एक ही व्यक्ति के ऊपर है । ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ २०२१’ में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने तमिलनाडु में मंदिरों की दुर्दशा से जनता को अवगत कराया ।
(सौजन्य : इंडिया टुडे)
१. सद्गुरु वासुदेव ने कहा कि राज्य में मंदिरों के नाम पर ५ लाख एकड भूमि है । २ करोड(कोटि) ३३ लाख वर्ग फीट क्षेत्र का निर्माण है; परंतु, इससे प्रति वर्ष मात्र १२८ करोड रुपए की ही आय हो रही है । इसमें से १४ प्रतिशत लेखापरीक्षण (ऑडिट) एवं प्रबंधन पर व्यय होता है, जबकि १-२ प्रतिशत पूजा, त्योहार एवं समारोहों में व्यय किया जाता है ।
२. सद्गुरु वासुदेव ने कहा कि ‘गुरुद्वारा प्रबंधक समिति’ के पास ८५ गुरुद्वारों का दायित्व है । उनकी वार्षिक आय १ सहस्र करोड रुपए है । वे अपने धर्मबंधुओं की अच्छी सेवा भी करते हैं । तमिलनाडु में हिन्दुओं की जनसंख्या ८५ प्रतिशत है । यहां ४४ सहस्र मंदिर हैं; परंतु उनकी वार्षिक आय मात्र १२८ करोड रुपए है ।
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