चीन के सैनिकों द्वारा पैगांग झील के पास से सेना पीछे लेने का परिणाम !
चीन विश्वासघात करने वाला देश होने के कारण उससे अधिक से अधिक कठोर व्यवहार कर उसके ऊपर दबाव बनाने के साथ उसकी सभी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता होते हुए भी यदि ऐसी मान्यता दी जा रही है, तो यह आत्मघाती निर्णय होगा, ऐसा ही राष्ट्र प्रेमियों को लगता है !

नई दिल्ली – गलवान घाटी में संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच तनाव बढने से भारत ने चीनी कंपनियों को दिए अनुबंध रद्य कर दिए थे । उसी प्रकार पैगांग झील के पास चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद चीन के अनेक ‘ऐप्स’ पर प्रतिबंध लगाया गया । उसी समय चीन की कंपनियों के निवेश पर भी प्रतिबंध लगाए गए थे । अभी चीन के साथ हुई वार्ता के बाद उसने पेगांग झील के पास से सेना को पीछे लेने के बाद भारत सरकार पुन: चीनी कंपनियों को निवेश के लिए मान्यता देने की तैयारी में है, ऐसा समाचार ‘रायटर’ नामक समाचार संस्था के सूत्रों से मिला है । भारत को चीन से लगभग ४५ निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की उम्मीद है, ऐसा इसमें कहा गया है । इनमें ग्रेट वॉल मोटर और एस.ए.आई.सी.- मोटर कॉर्प शामिल हैं ।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों में २ बिलियन (१४ सहस्र ४८८ करोड़ रुपये) के १५० प्रस्ताव लंबित हैं। इनमें से अधिकांश प्रस्ताव उत्पादों के बारे में हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संवेदनशील नहीं है, ऐसा कहा जा रहा है।
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