ग्रामीणों के इस मत पर क्या सरकार अब विचार करेगी ?

देहरादून (उत्तराखंड) – राज्य के चमोली में कुछ दिनों पूर्व हिमशिला (ग्लेशियर) गिरने से आए हुए प्रलय के कारण ६१ से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई तथा १२५ से अधिक लोग लापता हैं । इसमें २ जलविद्युत परियोजनाएं बह गईं । इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि ‘कालीदेवी के कारण यहां कोई भी जलविद्युत परियोजना पूर्ण नहीं होती । उसमें बाधाएं उत्पन्न होकर संबंधितों की हानि होती है । ग्रामीण इस देवी की आराधना करते हैं ।
१. १५ अगस्त २०११ को लुधियाना के उद्योगपति राकेश मेहरा के ऊपर इस स्थान पर बडा बोल्डर गिर पडा तथा उनकी मृत्यु हो गई । उस दिन उनके द्वारा खरीदे गए जलविद्युत संयंत्र के एक भाग का परीक्षण होनेवाला था । उस समय यह दुर्घटना हुई । इस नदीपर ६ वर्षाें उपरांत यह परियोजना पूर्ण होनेवाली थी । उस समय भी ग्रामीणों ने इसे देवी की चेतावनी कहा था । ‘नदी के प्रवाह में कोई बाधा उत्पन्न न करे’, ऐसी देवी की इच्छा है, यह ग्रामीणों का कहना है । इस नदी के परियोजनाओं की निरंतर हानि हो रही है । वर्ष २०१६ में यह परियोजना पूर्णतः बह गई थी ।
२. यहां के पर्यावरणवादी सोहनसिंह राणा ने कहा कि, वर्ष १९९८ में पहली बार राज्य के बाहर के लोगों ने जलविद्युत परियोजना के लिए भूमि खरीदी है, तब से यहां संकट आ रहे हैं । इस कारण आज ऐसी स्थिति है कि, रैणी गांव के लोग रात को रुकने से घबराते हैं । इस गांव के दिनेश चंद्रा ने बताया कि, हमारी कालीदेवी इस घाटी की रक्षा करती है । वे हमें निरंतर संकेत दे रही है । देवी प्रकृति पर हो रहे आक्रमण के संबंध में प्रसन्न नहीं है ।
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