ऑनलाइन ज्ञानम् महोत्सव में हिन्दू राष्ट्र संबंधी विशेष परिसंवाद में सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति का सहभाग

श्री. आनंद जाखोटिया

जयपुर (राजस्थान) – यहां होनेवाले ज्ञानम् महोत्सव में प्रतिवर्ष के समान इस वर्ष भी सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति के वक्ताओं ने सहभाग लिया । इस अवसर पर आयोजित हिन्दू राष्ट्र क्यों ? विषय पर ऑनलाइन परिसंवाद में सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री.चेतन राजहंस,हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री.रमेश शिंदे एवं हिन्दू जनजागृति के मध्य प्रदेश एवं राजस्थान समन्वयक श्री.आनंद जाखोटिया ने भाग लिया । ज्ञानम् के अध्यक्ष एवं ज्येष्ठ पत्रकार श्री.दीपक गोस्वामी ने चर्चासत्र का निवेदन किया ।

वर्ष २०२३ में स्थापित होनेवाला हिन्दू राष्ट्र सभी का अभ्युदय करनेवाला राष्ट्र रहेगा !-चेतन राजहंस

वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ यह हिन्दुओं की संस्कृति है । विश्‍वकल्याण की भावना मन में रखनेवाले हिन्दू सभी को स्वयं में समा लेते हैं । छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने कार्यकाल में बता दिया कि सभी का कल्याण हो सकता है । उनका हिन्दवी स्वराज हिन्दू राष्ट्र ही था । सनातन संस्कृति में प्राणीमात्रों के अभ्युदय के बारे में बताया गया है । संस्कृत में बहिष्कार शब्द ही नहीं है । इसलिए वर्ष २०२३ में स्थापित होनेवाला हिन्दू राष्ट्र सभी का अभ्युदय करनेवाला राष्ट्र है ।

मुस्लिम हैं हम सारा जहां हमारा, ऐसा वक्तव्य करनेवाले लोगों की पूरे विश्‍व को इस्लाममय करने की मानसिकता ध्यान में लेनी चाहिए ! – रमेश शिंदे

हिन्दी हैं हम, हिन्दोस्तां हमारा ऐसा कहनेवाले इक्बाल आगे चलकर पाकिस्तान गए एवं वहां उन्होंने मुस्लिम हैं हम, सारा जहां हमारा ऐसा वक्तव्य किया । पूरे विश्‍व को इस्लाममय करने की मानसिकता ध्यान में रखनी चाहिए । मुसलमान एवं ईसाई आक्रमणकर्ताओं की बात फैल जाती है । जेवियर ने गोवा में इन्क्विजिशन के नाम पर हिन्दुओं पर अत्याचार किए; परंतु उसके नाम से शैक्षिक संस्थाएं चल रही हैं । ३१ दिसंबर को नया वर्ष मनाने के लिए कहना,सांताक्लॉज समान झूठे पात्रों को खडा करना, ऐसा कर हिन्दुओं को भ्रमित करना, जिससे अपनेआप ही उनका धर्मपरिवर्तन हो जाता है । हिन्दू कहीं जाकर किसी का धर्मपरिवर्तन नहीं करते । कोरोना के कारण विदेशी भारतीय संस्कृति का पालन करने लगे ।

राम हमारे आराध्य देवता हैं,तो राममंदिर के साथ रामराज्य क्यों नहीं चाहिए ?- श्री. आनंद जाखोटिया

वर्ष १९९० में कश्मीरी हिन्दू विस्थापित हुए, तब स्वतंत्र भारत की सांसद, न्याययंत्रणा तथा प्रसारमाध्यम सब शांत बैठे रहे । तत्पश्‍चात आज अनेक स्थान पर कश्मीर समान परिस्थिति निर्माण हो रही है । तमिलनाडु में १९ महिने में १२० से अधिक मंदिरों एवं मूर्तियों पर आघात होने की घटनाएं हुईं । यदि आज भी बहुसंख्यक हिन्दुओं की आस्था के संबंध में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो हम हिन्दुओं को हिन्दू राष्ट्र की मांग क्यों नहीं करनी चाहिए ? यदि देश के संविधान के अनुसार सत्र न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक अनेक वर्ष संघर्ष करने पर भी राममंदिर निर्माण के लिए पथराव कर विरोध होगा, तो हिन्दुओं को उनकी सुरक्षा हेतु रामराज्य क्यों नहीं चाहिए ?