
नई देहली – भारतीय रक्षा मंत्रालय ने रक्षा से संबंधित सामग्री की खरीद के समय दूसरे देशों की सरकारों के साथ किए जानेवाले अनुबंधों में भारत में निवेश करने की शर्त (ऑफसेट नीति) को निरस्त करने का निर्णय लिया है । इसमें राफेल का भी समावेश है । ‘ऑफसेट’ की शर्त अधिक सफल न होने से उसे हटा देने का निर्णय लिया गया है । इस नीति के कारण युद्धसामग्री की तकनीक प्राप्त करने की अपेक्षा सुसज्जित युद्धसामग्री ही खरीदी जा सकेगी । अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित युद्धसामग्री प्राप्त करने पर बल दिया जा रहा है, ऐसा रक्षा मंत्रालय का कहना है ।
Centre Removes Offset Policy In Various Defence Purchases After CAG Flags Unmet Obligations In Rafale Dealhttps://t.co/SkTEOsbAQb
— Swarajya (@SwarajyaMag) September 29, 2020
कैग ने यह टिप्पणी की थी कि राफेल अनुबंध के अनुसार दासां प्रतिष्ठान की ओर से प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण करना भले ही अपेक्षित हो; परंतु इस प्रतिष्ठान ने उसके संबंध में किसी भी अंतिम तिथि की घोषणा नहीं की है । इस अनुबंध के अंतर्गत विदेशी प्रतिष्ठान को कुल अनुबंधमूल्य की ५० प्रतिशत धनराशि का भारतीय रक्षा उत्पादक प्रतिष्ठानों में निवेश करने का बंधन है । उसकी भी पूर्ति नहीं की गई है । (यदि विदेशी प्रतिष्ठान अनुबंध का पालन नहीं करते हों, तो भारत ऐसे अनुबंध करता ही क्यों है ? – संपादक)
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