मंदिर के लिए न्यासी समिति बनाने में लापरवाही करने पर न्यायालय ने फटकार लगाई !
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चेन्नई (तमिलनाडु) – पालानी मंदिर तमिलनाडु का सबसे अधिक आय देनेवाला मंदिर है । वर्ष २०११ में राज्य सरकार ने उस पर कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति की है । उसके विरुद्ध एक अधिकोष के भूतपूर्व अधिकारी और हिन्दुत्वनिष्ठ श्री. टीआर रमेश ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुराई खंडपीठ में याचिका प्रविष्ट की थी । इस याचिका पर उच्च न्यालय ने कुछ दिन पूर्व ही निर्णय देकर मंदिर पर सरकार द्वारा की हुई कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति को अवैध बताया है । उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नौ वर्षों के लिए न्यासियों की एक समिति नियुक्त करने की उपेक्षा के लिए फटकार लगाई ।
१. मंदिर के परिसर में स्वच्छता रखने के लिए मंदिर के कार्यकारी अधिकारी द्वारा एक निविदा में याचिका प्रविष्ट की गई थी ! श्री.टीआर रमेश द्वारा प्रविष्ट याचिका में मंदिर की ट्रस्टी समिति ने २०११ में त्याग पत्र दे दिया था और राज्य सरकार ने एक नई समिति नियुक्त करने की अपेक्षा एक कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया था । ऐसा करते समय मंदिर का कामकाज व्यवस्थित चलते रहने का उद्देश्य था । हालांकि, यह कार्यकारी अधिकारी स्वयं न्यासी बोर्ड के अधिकार की मांग करने लगा । उन्हें याचिका में चुनौती दी गई थी ।
२. इस याचिका पर निर्णय देते हुए न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन् ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ९ वर्षों से न्यासी समिति बनाने की अपेक्षा कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति करना संविधान के प्रावधान के विरुद्ध है । इस समय उच्च न्यायालय ने सर्वोेच्च न्यायालय के ‘वधवा अभियोग’ में हुए निर्णय का आधार लेकर कहा, ‘राज्य सरकार के मंदिर का व्यवस्थापन केवल वहां गलत व्यवस्थापन होने पर कुछ समय के लिए ही हाथ में लेने का अधिकार है’ !
३. ‘यह निर्णय देश के सभी मंदिरो के लिए ढाढस बंधानेवाला है । याचिकाकर्ता श्री. टीआर रमेश अभिनंदन के पात्र हैं’, भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ऐसा ट्वीट किया ।
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