चीन की ओर से ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ को २.२५ करोड रुपए का चंदा !
- कांग्रेस को इसकी सत्य जानकारी देश को देनी चाहिए, अन्यथा यही समझना पडेगा कि ‘कांग्रेस और चीन की सांठगांठ है, जो देश के अन्दर संकट बनकर आ रहा है !’
- कांग्रेस ने विगत ६० वर्षतक अपनी असीमित सत्ता का किस प्रकार उपयोग किया, यही इससे दिखाई देता है ! यह तो कांग्रेस का जनताद्रोह ही है !
- अब केंद्र सरकार को ही इसकी व्यापक जांच कर सत्य को जनता के सामने लाना चाहिए और इसमें यदि कांग्रेस दोषी प्रमाणित होती है, तो उसे ‘देशद्रोही’ घोषित कर उसपर तत्काल प्रतिबंध लगाना चाहिए !

नई देहली – केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पत्रकार परिषद में यह मांग की है कि चीन ने वर्ष २००५-०६ में ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ को ३ लाख डॉलर्स (लगभग २ करोड २६ लाख रुपए) चंदे के रूप में दिए थे । कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने चीन से यह पैसा किस शर्तपर लिया और उन पैसों का क्या किया ?
रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ को यह पैसा चीन के साथ ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (एफ.टी.ए.) के लिए मिला हैं, अर्थात बिना किसी बाधा के आयात-निर्यात करने हेतु मिला है । चंदा स्वीकार करते हुए ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ ने अनेक अध्ययनों का संदर्भ देते हुए भारत और चीन के मध्य ‘एफ.टी.ए.’ कितना आवश्यक है, यह समझाया । ‘फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट’ के अंतर्गत कोई भी राजनीतिक दल विदेश से चंदा नहीं ले सकता, साथ ही कोई भी निजी संस्था भी सरकार की अनुमति के बिना विदेश से पैसा नहीं ले सकती । कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसने यह चंदा लेने हेतु तत्कालीन सरकार से अनुमति ली थी ? ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ कोई शैक्षणिक अथवा सांस्कृतिक संस्था नहीं, अपितु वह एक राजनीतिक संस्था है । कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ की अध्यक्ष हैं । पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम् तथा कांग्रेस महासचिव प्रियांका वाड्रा ये सभी इस ‘फाउंडेशन’ के सदस्य हैं ।
‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ को सरकारी प्रतिष्ठानों की ओर से भी चंदा मिला !
‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ को जिस प्रकार चीन ने चंदा दिया है, उस प्रकार भारत के अनेक प्रतिष्ठित प्रतिष्ठानों द्वारा भी चंदा दिया है । भाजपा की ओर से इसकी सूची ही प्रस्तुत की गई । इसमें ओ.एन्.जी.सी., केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, केंद्रीय लघुउद्योग मंत्रालय, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे सरकारी विभाग भी अंतर्भूत हैं ।
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