पहले स्वयं ही शरारत करना और जब भारत उसका उत्तर देता है, तब पीछे हटने जैसे वक्तव्य देना, यही तो चीन की विश्वासघाती नीति है । भारत को इसे भीख न डालकर सदैव ही जैसे को वैसा उत्तर देने के लिए तैयार रहना चाहिए !

बीजिंग (चीन) – चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जाओ लिजियन ने अपने वक्तव्य में कहा है कि गलवान वैली के संप्रभुता सदैव ही चीन से संबंधित ही रही है । सीमाविवाद से संबंधित सूत्रोंपर हमारे कमांडर स्तर की चर्चा में सर्वसम्मति बननेपर भी भारतीय सेना ने सीमा पार कर हमारी सीमाओं के नियमों का उल्लंघन किया । हिंसक मुठभेड भी प्रत्यक्ष नियंत्रणरेखा के चीन के प्रदेश में हुई; इसलिए चीन इसका दोषी नहीं है । हमें इस प्रकार का और घमासान नहीं चाहिए ।
लिजियन ने पत्रकार परिषद में कहा कि हम भारत के सीमावर्ती प्रदेश के सैनिकों को अनुशासन का पालन करने, उल्लंघन एवं भडकाऊ कृत्य करने से रोकने का और चीन के साथ एकत्रितरूप से काम करने का सुझाव दे रहे हैं । हम भारत को चर्चा के माध्यम से मतभेद दूर करने हेतु उचित मार्गपर वापस लौटने के लिए कह रहे हैं । हम भारत के राजनीतिक और सेनाधिकारियों के स्तरपर चर्चा कर रहे हैं । केवल चर्चा से ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है । (चर्चा के द्वारा समस्या का समाधान निकालने की बात करना, तो चीन का शुद्ध ढोंग है । पहले घुसपैठ करने का अथवा विरोध करने का प्रयास करना और उसके पश्चात चर्चा करने की बातें करना ही चीन की रणनीति है ! – संपादक)
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