- हिन्दुओं के मंदिरों से धन की लूट के लिए केरल की वामपंथी सरकार का नया षड्यंत्र ! केरल में चर्चा और मस्जिदों के पैसे कभी सहायता कोष के लिए दिए जाने की बात क्या कभी सुनने में आई है ? देश पर प्रत्येक संकट के समय हिन्दू स्वयंस्फूर्ति से देश के लिए तन-मन-धन समर्पित करने में अग्रसर रहते हैं; परंतु क्या अन्य धर्मी कभी ऐसी प्रधानता लेते हैं ? अथवा सरकार उनके धार्मिक स्थलों से इस प्रकार धन की मांग करती है ?
- हिन्दुओं के मंदिरों का पैसा केवल हिन्दू धर्म के लिए ही खर्च करना आवश्यक है । जनता करों के माध्यम से जो सरकार को पैसा देती है, उस पैसे को भ्रष्टाचार के माध्यम से लूटा जा रहा है और इसे रोकने की अपेक्षा हिन्दुओं के मंदिरों को लूट कर उसका उपयोग सरकारी कार्यों के लिए किया जा रहा है । इसे रोकने हेतु अब धर्मप्रेमी हिन्दुओं को संवैधानिक मार्ग से प्रयास करने चाहिए !
- मंदिर सरकारीकरण के दुष्परिणामों को ध्यान में रखकर मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से मुक्त करने हेतु हिन्दुओं को संवैधानिक मार्ग से संघर्ष करना आवश्यक !

त्रिसूर (केरल) – कोरोना के विरुद्ध संघर्ष हेतु केरल राज्य के मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए केरल के सरकारीकृत किए गए गुरुवायूर मंदिर की आवर्ति जमाओं से ५ करोड रुपए देने का निर्णय गुरुवायूर देवस्थान समिति ने लिया है । अखिल भारतीय शबरीमला क्रियान्वयन समिति ने इस निर्णय का विरोध किया है ।

१. अखिल भारतीय शबरीमाला क्रियान्वयन समिति ने कहा है कि मंदिर की आवर्ति जमाओं से मुख्यमंत्री सहायता कोष में पैसा हस्तांतरित कर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है । देवस्थान की ओर से ५ करोड रुपए देने का लिया गया यह निर्णय नियमों और श्रद्धालुओं के लिए एक चुनौती है । हिन्दू श्रद्धालु सहायता कोष में अपनी क्षमता के अनुरूप योगदान देते हैं और कार्य में पर्याप्त सहभाग लेते हैं; परंतु बडी मात्र में धनराशि प्राप्त करने के सरल मार्ग के रूप में ईश्वर की संपत्ति को हडपना एक बडा अपराध है । श्रद्धालु किसी भी कारणवश इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे और इसका तीव्रता से विरोध किया जाएगा ।
२. अखिल भारतीय शबरीमाला क्रियान्वयन समिति के राष्ट्रीय महासचिव श्री. एस्.जे.आर्. कुमार ने कहा, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन् के नेतृत्व की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट दल की सरकार मंदिरों का पैसा हडपने की नीति अपना रही है, तो हिन्दू श्रद्धालु यातायात बंदी में व्यस्त हैं । इससे पूर्व त्रावणकोर देवस्थान का पैसा भी इसी प्रकार हडपने का प्रयास किया गया था, जिसे हिन्दू श्रद्धालु और संगठनों ने समय रहते हस्तक्षेप करने से रोका गया ।
३. श्री. कुमार ने आगे कहा कि हिन्दू के मंदिरों का पैसा सरकारी कोष में हस्तांतरित किया जा रहा है; परंतु अन्य पंथियों के धार्मिक स्थलों को इस नियम से छूट दी गई है । क्या इसी को धर्मनिरपेक्षता कहते हैं, क्या मार्क्सवादी सरकार द्वारा यह हिन्दुओं के साथ धोखाधडी नहीं है ? श्रद्धालु अब इस प्रकार के कृत्य सहन नहीं करेंगे ।
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