यातायात बंदी में छूट दिए जाने का दुष्परिणाम !
सामाजिक दूरी के तो बज गए बारा !
- भारतीय लोगों को इतने दिनों में कोरोना की गंभीरता ही ध्यान में नहीं आई है, यही इससे ध्यान में आता है ! अतः सरकार को इसकी ओर गंभीरता से ध्यान देकर दी गई छूट को रद्द करने में ही देशहित है !
- सर्वदलीय सरकारों ने जनता को व्यसनमुक्त कराने के लिए साधना की शिक्षा दी होती, तो आज दृश्य कुछ अलग होता !

नई देहली – ३ मई को यातायात बंदी समाप्त होने के पश्चात केंद्र सरकार ने उसे पुनः १७ मईतक बढाया; परंतु उसी समय देश के जनपदों का रेड (अतिसंवेदनशील), ऑरेंज (मध्यम संवेदनशील) और ग्रीन जोन (सुरक्षित) में वर्गीकरण कर उसके अंतर्गत बंदी में छूट दी । इसमें मदिराओं की दुकानों को खोलने की भी छूट थी । इसके अनुसार ४ मई को देश की राजधानी देहली के साथ ही अनेक नगर और जनपदों में मदिराओं की दुकानोंपर मदिरा खरीदने के लिए लोगों की भीड लग गई । मदिराओं की दुकानों के सामने सवेरे से ही लंबी पंक्तियां लगीं । इसमें शराब के लिए लगी भीड ने तो सामाजिक दूरी के बारा ही बजा दिए । इसके कारण पुलिस बल को भीड को तितर-बितर करने के लिए कठोर कदम उठाने पडे । देहली के कुछ स्थानोंपर पुलिसकर्मियों ने दोपहर के पश्चात सभी दुकानों को बंद करवाकर शराबियोंपर लाठीचार्ज कर उन्हें खदेड दिया । सामाजिक माध्यमोंपर इसके अनेक वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं ।
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