हिन्दू धर्मद्रोही प्राध्यापक के.एस. भगवान का आपत्ती जनक वक्तव्य : प्रभु श्रीराम के सन्दर्भ में की संतापजनक टिप्पणी
दावणगेरे (कर्नाटक) – तुम जिस श्रीराम की पूजा करते हो , वे दशरथ के पुत्र नहीं हैं । श्रीराम के पिता दशरथ ने पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया था । उस पूजा में रानी को पुरोहित के साथ रात्रि व्यतीत करनी पडती है । यदि रानी ने पुरोहित के साथ रात्रि व्यतीत की होगी , तो इसका अर्थ तुम स्वयं ही समझ लो , ऐसा अत्यन्त आपत्ती जनक एवं संतापजनक वक्तव्य प्राध्यापक के.एस. भगवान ने किया । वे दावणगेरे जनपद के हरिहर स्थित बी. कृष्णप्पा मैत्रीवन में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे । भगवान ने कहा कि , ‘राममन्दिर किसलिए चाहिए ?’ इस मेरी पुस्तक में मैंने यह लिखा है अथवा वाल्मीकि रामायण में भी इसका उल्लेख है । (बहुसङ्ख्यक हिन्दुओं के देश में उनके आराध्य प्रभु के प्रति ऐसा कोई बोल भी कैसे सकता है ? हिन्दुओं की भावनाओं को पैरों तले कुचलनेवाले ऐसों पर वैधानिक कार्रवाई कर उन्हें फांसी पर लटकाने का पुलिस को प्रयास करना चाहिए ! – सम्पादक)
🚨 How Long Will Hindus Be Expected to Tolerate Such Insults?
Harihar, Karnataka: Hindu religion-critic Prof. K.S. Bhagwan has made yet another controversial statement, claiming that “Shri Ram was not the son of Dasharatha,” citing his interpretation of the Putrakameshti Yajna… pic.twitter.com/kWlNRzRPh5
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 11, 2026
भगवान ने आगे कहा कि ,
१. शूद्र शम्बूक, पत्नी सीता एवं भाई लक्ष्मण को राम ने ही मारा । ऐसा व्यक्ति हमारा आदर्श कैसे हो सकता है ? (जिस व्यक्ति का समाज में महत्त्व ही नष्ट हो चुका है , वह व्यक्ति स्वयं का अस्तित्व दिखाने के लिए इस प्रकार के आपत्ती जनक वक्तव्य कर रहा है , यह ध्यान में लें ! – सम्पादक)
२. पञ्चाङ्ग देखना पहले बन्द कीजिए , पहले स्वयं पर विश्वास रखना सीखिए । ‘सर्व शूद्र ये ब्राह्मणों के दास हैं’ , ऐसा मनुस्मृति बताती है । (भगवान द्वारा किए गए इस शोध के लिए उन्हें अब ‘भारतरत्न’ ही देना चाहिए ! – सम्पादक)
३. गान्धीजी ने देश को ब्रिटिशों से स्वातन्त्र्य दिलाकर दिया , तो डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर ने जनता को इस दासता से मुक्त किया । (क्रान्तिकारियों के अतुलनीय त्याग का अनादर करनेवाले प्राध्यापक भगवान ! – सम्पादक)
४. विवाह के समय पुरोहित जो मन्त्र बोलते हैं , उसका अर्थ आपको ज्ञात नहीं होता । मुझे तो यह ज्ञात होने के कारण ही मैंने अपने विवाह में किसी भी पुरोहित को न आमन्त्रित करने के लिए अपने पिता को कहा था । (भगवान की मनोविकृति के पीछे के कारण अब समझ में आए । हिन्दू श्रेष्ठ परम्पराओं के , आध्यात्मिक मन्त्रों के संस्कार ही जिस व्यक्ति पर नहीं हुए हैं , वे ऐसा ही बोलेंगे ! – सम्पादक)
५. वर्तमान की पाठ्यपुस्तकें सत्य के बिना अपना अस्तित्व खो बैठी हैं । स्वामी विवेकानन्द ने ‘हम बौद्ध धर्म के हैं’ , ऐसा बताया था । बौद्ध धर्म यह अत्यन्त मानवतावादी एवं वैज्ञानिक धर्म है । मेरे इस वक्तव्य पर यदि किसी को अपराध पञ्जीकृत करना हो , तो वे सम्पूर्ण जानकारी लेकर ही अपराध पञ्जीकृत करें , ऐसा उन्होंने कहा है । (भगवान मोहम्मद पैगम्बर का सत्य इतिहास बताकर ऐसा आह्वान क्यों नहीं करते ? – सम्पादक)

अब सहन नहीं करेंगे, प्रा. भगवान की जीभ उखाड देंगे !
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