NEET Paper Leak प्रकरण का लातूर-पुणे समेत देशभर में भयानक नेटवर्क !

  • मुख्य सरगना सहित कई चिकित्सक एवं अत्यंत धनाढ्य अभिभावकों की संलिप्तता !

  • १० लाख रुपये में बेचे गए प्रश्नपत्र; करोडों रुपये का काला कारोबार उजागर !

प्रो. पी.वी. कुलकर्णी

मुंबई — ‘नीट’ पेपर लीक प्रकरण की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को पता चला है कि इस घोटाले के तार लातूर, पुणे, नांदेड, नाशिक, वाशिम, राजस्थान की राजधानी जयपुर एवं हरियाणा के गुरुग्राम सहित देश के अनेक शहरों तक फैले हुए हैं । पूरे घोटाले का मुख्य सरगना लातूर के दयानंद महाविद्यालय का रसायनशास्त्र का सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पुणे निवासी प्रो. पी.वी. कुलकर्णी बताया जा रहा है । वह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की अत्यंत गोपनीय प्रश्नपत्र निर्माण समिति का सदस्य था । उसने अपने पद एवं गोपनीयता का दुरुपयोग किया । इस प्रकरण में नाशिक के शुभम खैरनार, गुरुग्राम के यश यादव एवं जयपुर के मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल तथा दिनेश बिवाल को बंदी बनाया गया है ।

पेपर लीक का घटनाक्रम इस प्रकार था…!

१. प्रो. कुलकर्णी ने पुणे स्थित अपने घर पर गैर-आधिकारिक एवं गुप्त कक्षाएं चलाईं । वहां चुनिंदा विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र एवं विकल्प देकर उत्तर रटवाए गए । ३ मई की परीक्षा में वही प्रश्न आने से प्रकरण उजागर हुआ ।

२. टेलीग्राम एवं व्हाट्सऐप के माध्यम से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को ‘मुफ्त टेस्ट पेपर’ एवं अध्ययन सामग्री का लालच दिया गया । विश्वास जीतने के उपरांत धनाढ्य परिवारों को लक्ष्य बनाया गया ।

३. एक अभिभावक ने १० लाख रुपये देकर प्रश्नपत्र खरीदा । पैसे वसूलने के लिए उसने वही प्रश्नपत्र अन्य २ अभिभावकों को ५-५ लाख रुपये में बेच दिया ।

४. परीक्षा से २ दिन पहले लातूर एवं पुणे के आलीशान होटलों में गुप्त बैठकों के समय अभिभावकों के मोबाइल फोन अधिग्रहित कर उन्हें प्रश्नपत्र एवं उत्तर दिखाए गए ।

५. इस काले कारोबार में शिक्षकों, दलालों, चिकित्सकों एवं अत्यंत धनाढ्य अभिभावकों की बडी श्रृंखला सक्रिय थी ।

६. मनीषा वाघमारे नामक महिला ने धनाढ्य ग्राहकों को खोजा । आरोपियों ने पूरा पेपर एक साथ न देकर विषयवार टुकडों में लीक किया ।

७. वाशिम के एक प्रख्यात चिकित्सक एवं नांदेड के धनाढ्य अभिभावक पूछताछ के भय से अपने मोबाइल बंद कर फरार हो गए हैं ।

संपादकीय भूमिका

  • यह समाज की गिरती नैतिकता का स्पष्ट उदाहरण है ! भौतिक प्रगति एवं धन के कारण नैतिकता खो चुके शिक्षा क्षेत्र में ऐसे घोटाले हो रहे हैं । ‘परीक्षा में केवल अंक प्राप्त करना ही सबकुछ है’ इस अत्यधिक हठ के कारण अभिभावक एवं शिक्षक नैतिक मूल्यों को तिलांजलि दे रहे हैं ।
  • अब इन धनाढ्य लोगों पर कडी कार्रवाई होनी चाहिए तथा उन्होंने कितने भी पैसे देने का प्रयास किया, फिर भी उन्हें प्रतिभूती (जमानत) नहीं मिलनी चाहिए — ऐसी सामान्य जनता की अपेक्षा है !
  • असंख्य ईमानदार विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करके परीक्षा देते हैं; लेकिन ऐसे भ्रष्ट तरीकों के कारण उनकी शैक्षिक हानि होती है । इस हानि के लिए संबंधित लोगों को उत्तरदायी ठहराने की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए !