James Webb Space Telescope : ‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ द्वारा मानव ने पहली बार किया बाह्यग्रह की सतह का अध्ययन !

पृथ्वी से ४८.५ प्रकाशवर्ष दूर स्थित ‘एल.एच.एस. ३८४४ बी’ ग्रह की सतह का हुआ अध्ययन !

1 प्रकाशवर्ष अर्थात् प्रकाश की अत्यंत तीव्र गति से १ वर्ष में तय की गई दूरी । प्रकाश की गति लगभग ३ लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है । इसी गति से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुंचने में ८ मिनट २० सेकंड लेता है । अर्थात सूर्य पृथ्वी से केवल ८.२० प्रकाश मिनट दूर है ।

न्यूयॉर्क (अमेरिका) – मानव ने अब तक पृथ्वी जैसे अनेक बाह्यग्रह खोजे हैं, जो अपने तारों की परिक्रमा करते हैं । बाह्यग्रह अर्थात ‘एक्सोप्लैनेट’, यानी हमारी सौरमाला के बाहर स्थित ग्रह । वर्ष १९९५ में ऐसे पहले बाह्यग्रह की खोज में अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संस्था ‘नासा’ को सफलता मिली थी । इसके उपरांत लगभग ३० वर्षों में मनुष्य ने करीब ६ सहस्र बाह्यग्रहों की खोज की है । यद्यपि ब्रह्मांड में रहे अरबों ग्रहों की तुलना में यह संख्या बहुत कम है । फिर भी पिछले ५ वर्षों में इन ग्रहों की खोज में उल्लेखनीय तेजी आई है ।
‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ जैसी अंतरिक्ष में कार्यरत अत्याधुनिक दूरबीनों के कारण इन खोजों में गति आई है । अब वैज्ञानिक इस दूरबीन के उन्नत उपकरणों की सहायता से दूर स्थित ग्रहों के भूगर्भीय स्वरूप का अध्ययन कर रहे हैं, जो पहले संभव नहीं था ।

बाह्यग्रह पर पृथ्वी जैसी भूगर्भीय गतिविधियां नहीं !

वैज्ञानिकों ने एलएचएस ३८४४ बी नामक बाह्यग्रह की सतह की संरचना का विश्लेषण किया है । यह ग्रह पृथ्वी से ४८.५ प्रकाशवर्ष दूर स्थित है । दूरबीन की उन्नत अवलोकन (दृष्टि) तकनीक की सहायता से वैज्ञानिक ग्रह की सतह से निकलनेवाली ऊष्मा को अलग पहचानने में सफल हुए । इससे वातावरणीय संकेतों पर निर्भर हुए बिना सतह की संरचना का अध्ययन संभव हुआ ।

शोधकर्ताओं ने पृथ्वी, चंद्रमा एवं मंगल ग्रह पर पाए जानेवाले चट्टानी पदार्थों की तुलना इस बाह्यग्रह से प्राप्त अवरक्त (इन्फ्रारेड) संकेतों से की । परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि वहां ‘ग्रेनाइट’ जैसे सिलिका-समृद्ध पदार्थ नहीं हैं, जो सामान्यतः जल-आधारित वातावरण में बनते हैं । इससे संकेत मिलता है कि इस ग्रह पर पृथ्वी जैसी भूगर्भीय गतिविधियां नहीं हैं ।

ग्रह का तापमान ७२५ डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है !

इस बाह्यग्रह के अध्ययन से यह भी ज्ञात हुआ कि वह ‘टाइडली लॉक्ड’ है, अर्थात उसकी एक ही सतह हमेशा अपने तारे की ओर रहती है । ग्रह का दिनवाला भाग अत्यंत गर्म है, जहां तापमान लगभग ७२५ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है । इसका उसकी सतह की संरचना पर बडा प्रभाव पडता है ।

विभिन्न निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि ग्रह की सतह या तो ठोस चट्टानों से बनी हो सकती है अथवा उस पर ढीले पदार्थों की परत हो सकती है । भविष्य के अध्ययन से यह अधिक स्पष्ट हो सकेगा ।

यह अध्ययन भविष्य में अन्य बाह्यग्रहों के शोध के लिए नई दिशा प्रदान करेगा !

‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ द्वारा किए गए इस अध्ययन की सफलता भविष्य में अन्य बाह्यग्रहों की संरचना तथा उनके वातावरण के अध्ययन के लिए आधार तैयार करेगी । आगे चलकर इससे ऐसे रासायनिक संकेतों की पहचान में सहायता मिल सकती है, जो किसी ग्रह की रहने योग्य स्थिति (Habitability) से संबंधित हों । ग्रहों की खोज का यह नया चरण हमें ग्रह प्रणालियों को अधिक अच्छे ढंग से समझने में सहायता करेगा तथा ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे वातावरणवाले अन्य ग्रहों की खोज के और अधिक निकट ले जाएगा ।

 

संपादकीय भूमिका

‘जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप’ के माध्यम से वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी बाह्यग्रह (एक्सोप्लैनेट) की सतह का प्रत्यक्ष अध्ययन करने में सफलता प्राप्त की है ।