NEET Exam Row : ‘नीट’ परीक्षा के समय तुलसी की माला पहनी हुई छात्रा को प्रवेश नहीं दिया गया

  • बुरका पहने हुए छात्रा को यद्यपि प्रवेश दे दिया गया

  • लोगों में क्रोध की लहर

(नीट) – ‘नेशनल टैलेंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन’ अर्थात राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा)
(बुरका – शरीर को पूरी तरह ढकने वाला वस्त्र)

नई दिल्ली – कुछ दिनों पूर्व ‘नीट’ परीक्षा के समय परीक्षा केंद्रों में छात्र‑छात्राओं की कड़ी जांच के लघु चलचित्र बडी संख्या में तीव्रगति से प्रसारित हुए। एक लघु चलचित्र में बुरका परिधान कर परीक्षा केंद्र में पहुंची छात्रा को प्रवेश मिला; दूसरे लघु चलचित्रमें तुलसी की माला पहनी एक छात्रा को माला उतारने के लिए विवश किया गया । इससे समाज में आक्रोश की लहर उठ खडी हुई । ‘नीट’ परीक्षा छात्र‑छात्राओं के लिए एम.बी.बी.एस. आदि चिकित्सा क्षेत्रों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है । ३ मई को देशभर से लगभग २० लाख ५ सहस्त्र छात्रों ने नीट परीक्षा दी ।

१. पहला लघु चलचित्र राजस्थान के बाडमेर जिले से है । इसमें बुरका पहनी एक छात्रा को केवल मुख पहचानने के उपरांत परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया ।

२. यह लघु चलचित्र देखने के उपरांत अनेक लोगों ने प्रश्न उठाया कि इतनी कठोर जांच के उपरांत भी किसी छात्रा को बुरका परिधान कर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने की अनुमति कैसे दी जा रही है ?

३. दूसरा लघु चलचित्र गुजरात के सूरत नगर का है । वहां एक छात्रा को तुलसी की माला धारण कर प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे भारी हंगामा मच गया । लघु चलचित्र में छात्रा के पिता ने इस कडी जांच के विरुद्ध अनेक प्रश्न उठाए एवं कहा कि हम सूरत में हैं, पाकिस्तान में नहीं ।

४. इसके उपरांत सामाजिक माध्यमों पर चर्चा छिड गई कि एक ओर इतनी कडी जांच हो रही है कि हिन्दू छात्रों द्वारा धारण किए जाने वाले हिन्दू धर्म के प्रतीकों तक को नहीं छोडा जा रहा; दूसरी ओर मुसलमान छात्राओं को बुरके के साथ परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जा रहा है । वास्तव में नीट परीक्षा में हिजाब (मुसलमान महिलाओं के मस्तक एवं गले को ढकने वाले वस्त्र) को तो अनुमति है, किंतु बुरके को नहीं ।

५. तीसरा लघु चलचित्र राजस्थान के सीकर नगर का है, जहां परीक्षार्थियों के पायजामे की डोरी एवं यहां तक कि उनकी चेन भी काटकर निकाल दी गई; केवल इसके उपरांत उन्हें प्रवेश दिया गया ।

संपादकीय भूमिका

ऐसी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि ‘केवल सरकार हिन्दुत्वनिष्ठ होना पर्याप्त नहीं है, अपितु पूरी व्यवस्था में हिन्दुत्वनिष्ठ *होना आवश्यक है; ऐसा होने पर ही हिन्दुओं की समस्याओं का समाधान होगा एवं उनके हित सुरक्षित रहेंगे ।’