मानव विनाशकारी ए आई : वैज्ञानिकों को बताई जैविक शस्त्र बनाने की संपूर्ण पद्धति !

ए आई मॉडल्स’ के सुरक्षा कवचों पर (विपत्तिजनक उत्तरों पर अंकुश लगाने पर) प्रश्नचिन्ह उपस्थित !

न्यूयॉर्क (अमेरिका) – अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘स्टॅनफर्ड विश्वविद्यालय’ के सूक्ष्मजीवविज्ञानी डॉ. डेविड रलमैन ने एआई द्वारा प्राप्त हो रही मानव-विनाशक सूचनाओं के विषय में गंभीर चिंता व्यक्त की है । उन्हें एक ‘एआईउपकरण’ ने जैविक शस्त्र कैसे बनाए जाएं ?, इस विषय में विस्तार से जानकारी प्रदान की । संक्षेप में, सामूहिक नरसंहार की संपूर्ण योजना कैसे तैयार की जाए, इस विषय में एआई द्वारा अक्षरशः बताए जाने पर वे स्तंभित रह गए । रलमैन को एक एआई संस्थान ने अपना ‘एआई चैटबॉट’ (एआई प्रणाली) प्रसारित करने से पूर्व ‘क्या वह उचित प्रकार से सुरक्षित उत्तर देता है ?’, इसके परीक्षण हेतु नियुक्त किया था । इस समय चैटबॉट ने न केवल यह जानकारी दी कि घातक रोगजनक को प्रयोगशाला में किस प्रकार परिवर्तित किया जाए कि उस पर वर्तमान औषधियां निष्प्रभावी हो जाएं, अपितु उसने विशाल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर उसका प्रयोग कर अधिकाधिक लोगों के प्राण कैसे लिए जा सकते हैं, इसका भी विस्तृत वर्णन रलमैन के बिना पूछे ही दे दिया । ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने यह समाचार प्रसारित किया है ।

वर्तमान ‘एआई मॉडेल्स’ द्वारा विनाशकारी उत्तर दिए जाने के कुछ उदाहरण !

१. डॉ. डेविड रलमैन ने बताया कि, मैं विचार भी नहीं कर सकता, उस प्रकार से वह ‘एआई चैटबॉट’ मुझे अत्यंत ‘चातुर्य’ तथा ‘धूर्तता’ से उत्तर दे रहा था ।

२. संक्षेप में, ‘जेमिनी’, ‘चैटजीपीटी’ तथा ‘अँथ्रोपिक’ जैसे ‘एआई मॉडल्स’ संकटपूर्ण सूचनाएं देने में सक्षम हैं ।

३. विश्व में अग्रणी ‘मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के वैज्ञानिक केविन एसवेल्ट ने बताया कि, ‘चैटजीपीटी’ ने जैविक शस्त्र छिडकने की योजना बनाई, जिससे उन्हें एक विशाल गुब्बारे के माध्यम से किसी भी अमेरिकी नगर पर छिडका जा सके ।

४. ‘गूगल जेमिनी’ ने ऐसे रोगजनकों की सूची दी, जो मांस उद्योग को भारी क्षति पहुंचा सकते हैं ।

५. ‘अँथ्रोपिक क्लाउड’ ने नवीन विषाक्त व्यंजन-विधि (रेसिपी) प्रस्तुत की ।

६. गूगल के ‘डीप रिसर्च’ से एक वैज्ञानिक ने ‘महामारी फैलाने वाले विषाणु को कैसे निर्मित किया जाए ?’, इसकी जानकारी मांगी । तब उसने वैज्ञानिक को ८ सहस्र शब्दों के विस्तृत निर्देश दिए ।

७. एआई संस्थान दावा करते हैं कि वे निरंतर सुरक्षा कवच सशक्त कर रहे हैं, किंतु विशेषज्ञ उन्हें ‘अक्षम बाडा’ मानते हैं, जिसे ‘जेल-ब्रेकिंग’ से सुगमता से भेदा जा सकता है । (यह एक ऐसी पद्धति है, जिससे किसी भी एआई मॉडल को अपने प्रश्नों से भ्रमित किया जाता है तथा उससे मानव के लिए संकटपूर्ण सूचनाएं निकलवाई जा सकती हैं ।)

संपादकीय भूमिका

अत्याधुनिक तकनीक मानव के सर्वनाश करने में सक्षम हो गई है, ऐसा ही इससे कहा जा सकता है ! ‘ए आई’ पर नियंत्रण पाने हेतु मानव-समूह को एकत्रित होकर ए आई संस्थानों पर दबाव बनाना समय की आवश्यकता है !