Maldives Betrays India : भारत से ३ सहस्र करोड लेकर भी पुनः चीन की हेरगिरी नौका को दिया स्थान !

मालदीव द्वारा भारत से विश्वासघात !

चीन की हेरगिरी करनेवाली नौका ‘शी यान ६’ (चित्र पे क्लिक करें )

माले (मालदीव) – चीन की तथाकथित ‘संशोधन नौका’ , अर्थात हेरगिरी करनेवाली नौका ‘शी यान ६’ मालदीव में प्रविष्ट हुई है । हिन्दी महासागर क्षेत्र में भ्रमण पूर्ण करने के उपरान्त इस नौका ने २४ अप्रैल २०२६ के दिन मालदीव की राजधानी माले के बंदरगाह पर लंगर डाला । भारत के आक्षेप के उपरान्त भी मालदीव सदैव ही भारतविरोधी कार्यवाहियों को आश्रय देता आया है । विशेष बात यह है कि मालदीव ने इस चीनी नौका को ऐसे समय में अपने बंदरगाह पर आने की अनुमति दी है , जब भारत ने मालदीव को ३ सहस्र करोड रुपयों की सहायता की है । अप्रैल २०२६ में भारत ने ऋण चुकाने में सहायता करने हेतु ‘करन्सी स्वैप’ (निश्चित कालावधि के लिए दो पक्षों द्वारा अलग-अलग चलनों का आदान-प्रदान कर बाद में उसे लौटाने का अनुबन्ध) स्वरूप में यह महत्त्वपूर्ण सहायता प्रदान किया है ।

मालदीव वर्तमान में गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है । उनका विदेशी मुद्रा भंडार सतत कम हो रहा है एवं वे ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं हैं । ऐसा होने पर भी सुंडा जलडमरूमध्य से हिन्दी महासागर में घुसकर ‘नाइन्टी ईस्ट रिज’ जैसे संवेदनशील भाग में सर्वेक्षण करनेवाली चीनी नौका को मालदीव ने अनुमति दी है । यह चीन की वहां की सुदृढ पकड दर्शाता है । यह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है ।

भारतीय युद्धपोत भी मालदीव पहुंचा !

माले स्थित भारतीय दूतावास ने जानकारी दी है कि , भारतीय नौसेना का युद्धपोत ‘आय.एन्.एस्. कल्पेनी’ भी मालदीव पहुंचा है एवं उसने ‘अड्डू एटोल’ पर लंगर डाला है । यह भेंट हमारे घनिष्ठ मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध एवं बहुआयामी रक्षा सहयोग को दिखाती करती है । कदाचित् मालदीव सरकार सन्तुलन बनाए रखने के लिए ऐसा कर रही हो ; परन्तु हिन्द महासागर में चीन की हेरगिरी नौकाओं का बार-बार आना एवं मालदीव का उन्हें स्थान देना , यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भविष्य में संकट सिद्ध हो सकता है ।

चीन की हेरगिरी करनेवाली नौका का कार्य !

चीन अपनी ‘शी यान ६’ इस नौका को वैज्ञानिक संशोधन नौका बताता है ; परन्तु प्रत्यक्ष में यह चीनी नौसेना की ‘ड्यूल-यूज’ (दोहरा उपयोग) नौका है । यह नौका हिन्द महासागर की गहराई , समुद्र के तल की रचना एवं पानी के प्रवाह की जानकारी एकत्रित करती है । इस जानकारी से चीन को उसकी पनडुब्बी को भारतीय सीमा के समीप गुप्त रूप से तैनात करने में सहायता मिलती है ।।

संपादकीय भूमिका

भारत की आत्मघाती गांधीगिरी कब रुकेगी ? अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव आदि इस्लामी देशों को भारत ने कितनी सहायता किया , तब भी उनके दृष्टि से भारत हिन्दुओं का अर्थात काफिरों का देश है । उन्हें भारत का इस्लामीकरण करना है । इसलिए वे कभी भी भारत एवं हिन्दुओं से प्रामाणिक नहीं रह पाएंगे , यह सत्य भारत कब स्वीकारेगा ? अथवा तथाकथित कूटनीती के नाम पर आत्मघात करता रहेगा ?