शबरीमाला मंदिर में १० से ५० वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का प्रकरण

नई दिल्ली – यदि किसी श्रद्धालु को देवता की मूर्ति को स्पर्श करने से रोका जाता है, तो क्या उस स्थिति में राज्यघटना उसके समर्थन में आगे आएगी, ऐसा प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय ने शबरीमाला मंदिर में १० से ५० वर्ष आय वर्ग की महिलाओं के प्रवेश से संबंधित प्रकरण की सुनवाई के समय उठाया ।
“If touching a deity’s idol is prohibited, will the Constitution intervene?” – The Supreme Court asks during the hearing on women’s entry (ages 10–50) into Sabarimala Temple.
If the Constitution is not invoked to reform entry practices in mosques, then why is it repeatedly used… pic.twitter.com/AjOfdXRdVF
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) April 21, 2026
इस प्रकरण में मंदिर के प्रमुख पुजारियों की ओर से यह कहा गया कि पूजा-पद्धति तथा धार्मिक अनुष्ठान धर्म का अभिन्न अंग हैं तथा उन्हें धार्मिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए । जब कोई भक्त मंदिर में आता है, तो उसे देवता के स्वरूप तथा उससे संबंधित परम्पराओं को स्वीकार करना आवश्यक होता है ।
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