यदि किसी श्रद्धालु को देवता की मूर्ति को स्पर्श करने से रोका जाता है, तो क्या ऐसी स्थिति में राज्यघटना सहारा देगी ? – सर्वोच्च न्यायालय का प्रश्न

शबरीमाला मंदिर में १० से ५० वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का प्रकरण

नई दिल्ली – यदि किसी श्रद्धालु को देवता की मूर्ति को स्पर्श करने से रोका जाता है, तो क्या उस स्थिति में राज्यघटना उसके समर्थन में आगे आएगी, ऐसा प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय ने शबरीमाला मंदिर में १० से ५० वर्ष आय वर्ग की महिलाओं के प्रवेश से संबंधित प्रकरण की सुनवाई के समय उठाया ।

इस प्रकरण में मंदिर के प्रमुख पुजारियों की ओर से यह कहा गया कि पूजा-पद्धति तथा धार्मिक अनुष्ठान धर्म का अभिन्न अंग हैं तथा उन्हें धार्मिक अधिकार के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए । जब कोई भक्त मंदिर में आता है, तो उसे देवता के स्वरूप तथा उससे संबंधित परम्पराओं को स्वीकार करना आवश्यक होता है ।

संपादकीय भूमिका

  • यदि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश के विषय में राज्यघटना हस्तक्षेप नहीं करती, तो मंदिरों में मूर्ति के स्पर्श के लिए वह कैसे हस्तक्षेप कर सकती है, ऐसा प्रश्न कुछ लोगों के मन में उठ सकता है ।
  • हिन्दू मंदिरों में प्रवेश तथा मूर्ति-स्पर्श के संदर्भ में परंपरा तथा शास्त्र होने के कारण उनका पालन करना आवश्यक माना जाता है ।