Surajya Abhiyan : विशेष दुकान से शैक्षिक सामग्री खरीदने की अनिवार्यता पर शिक्षा संस्थानों द्वारा रोक !

  • शैक्षिक सामग्री की खरीद में अभिभावकों से लूट रोकनेवाले ‘सुराज्य अभियान’ के प्रयास को बडी सफलता !

  • परिवाद निवारण विभाग आरंभ करने का आदेश !

प्रातिनिधिक चित्र

मुंबई – निजी विद्यालयों द्वारा शैक्षिक सामग्री के नाम पर अभिभावकों से की जा रही आर्थिक लूट को रोकने के लिए ‘सुराज्य अभियान’ द्वारा चलाए गए अभियान को बडी सफलता मिली है । विद्यालय ‘केवल एक ही विशेष दुकान से यूनिफॉर्म, कॉपियां या शैक्षिक सामग्री खरीदने की बाध्यता न करें’, इस हेतु शिक्षा संचालनालय ने १५ अप्रैल को परिपत्र जारी किया है । इस आदेश की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें केवल नियम बताने तक सीमित न रहकर ‘सक्षम परिवाद निवारण तंत्र’ को सक्रिय करने का निर्देश भी दिया गया है ।

‘सुराज्य अभियान’ ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसी प्रकार की पारदर्शी व्यवस्था देश के सभी राज्यों तथा शिक्षा मंडलों में लागू करने की मांग केंद्रीय शिक्षामंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र के माध्यम से की है, ऐसा सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री अभिषेक मुरुकटे ने बताया ।

परिपत्र के प्रमुख अनिवार्य बिंदु !

राज्य शिक्षा संचालनालय ने परिपत्र के माध्यम से निर्देश दिया है कि ‘संबंधित क्षेत्र की सभी विद्यालय शैक्षिक वर्ष २०२६-२७ से यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षिक सामग्री केवल किसी एक विशेष दुकान या विद्यालय से ही खरीदने की अनिवार्यता नहीं रखें’, इस संबंध में तत्काल निर्णय लिया जाए ।

१. इस संदर्भ में प्राप्त होनेवाले परिवादों के लिए अपने कार्यालय का ई-मेल पता सार्वजनिक किया जाए तथा इस विषय के लिए नोडल (विशिष्ट परियोजना हेतु नियुक्त) अधिकारी की नियुक्ति की जाए ।

२. अपने क्षेत्र की सभी माध्यमों की विद्यालयों में इस परिपत्र की जानकारी व्यापक रूप से पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए ।

३. इस संदर्भ में परिवाद प्राप्त होने पर शिक्षा अधिकारी या प्रशासन अधिकारी उसकी जांच करें एवं तथ्य सही पाए जाने पर संबंधित विद्यालय पर कार्रवाई करें ।

सुराज्य अभियान का अभिभावकों से आवाहन !

श्री. अभिषेक मुरुकटे, समन्वयक, सुराज्य अभियान

‘केवल नियम होना पर्याप्त नहीं, उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही वास्तविक सुशासन है’, ऐसा मत व्यक्त करते हुए सुराज्य अभियान के महाराष्ट्र राज्य समन्वयक श्री अभिषेक मुरुकटे ने कहा –

१. विद्यालयों की मनमानी के विरोध में ११ जून २००४ का शासन निर्णय उपलब्ध होने के उपरांत भी प्रभावी कार्यवाही और तंत्र के अभाव में अभिभावकों की लूट जारी थी । सुराज्य अभियान के सतत प्रयासों से अब ये ‘कागजी नियम’ वास्तविकता में लागू होंगे ।

२. महाराष्ट्र में परिवाद निवारण का मार्ग उपलब्ध हो गया है, इसलिए अभिभावकों को बिना भय के नोडल अधिकारी या ई-मेल के माध्यम से प्रमाण सहित परिवाद करना चाहिए । अभिभावक इस विषय में सुराज्य अभियान से भी संपर्क कर सकते हैं ।

३. विद्यालय केवल व्यावसायिक केंद्र नहीं, अपितु ज्ञान प्रदान करनेवाले पवित्र स्थान हैं – इस सिद्धांत को बनाए रखने के लिए अभिभावकों का जागरूक होना आवश्यक है ।

४. भारत के अन्य राज्यों ने भी इसी प्रकार के कदम उठाए हैं; फिर भी यह समस्या पूरे देश में फैली हुई है और कई केंद्रीय बोर्ड की स्कूलें राज्य के नियमों का पालन नहीं करतीं । इसलिए हमने केंद्रीय शिक्षा सचिव और शिक्षामंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से मांग की है कि पूरे देश के लिए एक समान राष्ट्रीय स्तर का आदेश लागू किया जाए, जिससे किसी भी राज्य में अभिभावकों की आर्थिक लूट न हो ।

संपादकीय भूमिका

अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को सुविधा मिलने पर ‘सुराज्य अभियान’ का अभिनंदन !