अक्षय तृतीया के पर्व पर ‘सत्पात्र को दान’ देकर ‘अक्षय दान’ का फल पाएं !

सभी पाठक, हितचिंतक और धर्मप्रेमियों से विनम्र निवेदन !

‘१९.४.२०२६ को ‘अक्षय तृतीया’ है । ‘अक्षय तृतीया’ हिन्दू धर्म के साढे तीन शुभमुहूर्ताें में से एक मुहूर्त है  । इस दिन की कोई भी घटिका शुभमुहूर्त ही होती है । इस दिन किए जानेवाले दान और हवन का क्षय नहीं होता; अर्थात उनका फल हमें प्राप्त होता ही है । इसलिए बहुत-से लोग इस दिन बडी मात्रा में दानधर्म करते हैं ।

१. ‘सत्पात्र दान’ का महत्त्व !

हिन्दू धर्म बताता है कि ‘सत्पात्र को दान करना, प्रत्येक मनुष्य का परमकर्तव्य है ।’ सत्पात्र को दान करने का अर्थ है सत् के कार्य हेतु दानधर्म करना ! दान देने से मनुष्य का पुण्यबल बढता है तथा ‘सत्पात्र को दान’ देने से पुण्यसंचय सहित व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ भी मिलता है । अक्षय तृतीया के दिन आगे दिए अनुसार ‘सत्पात्र को दान’ दिया जा सकता है ।

२. दान के प्रकार

२ अ. धनदान : आज का समय धर्मग्लानि का है । धर्मशिक्षा के अभाव में हिन्दू समाज अधर्माचरणी बन गया है । उचित धर्मशिक्षा न देने से हिन्दुओं का धर्माभिमान नष्ट हो चुका है । धर्म की ऐसी दयनीय स्थिति में धर्म के पुनरुत्थान का कार्य करना, काल के अनुसार अनिवार्य हो गया है । अतः धर्मप्रसार करनेवाले संतों, साथ ही राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु कार्यरत संस्थाओं अथवा संगठनों के कार्य हेतु दान देना, यह काल के अनुसार सर्वश्रेष्ठ दान है । सनातन संस्था धर्मजागृति का यही कार्य कर रही है । अर्पणदाताओं द्वारा इस प्रकार की संस्था अथवा संगठन को दिए जानेवाले दान (अर्पण) का विनियोग धर्म की पुनर्स्थापना हेतु ही होगा । (सनातन संस्था को धन दान की अपेक्षा नहीं । यहां दान करने का शास्त्र बताया गया है ।)

२ आ. ज्ञानदान : सनातन की बहुविध एवं सर्वांगस्पर्शी ग्रंथसंपत्ति चिरंतन ज्ञान की अनमोल धरोहर है । ये ग्रंथ सरल भाषा में पाठकों को अनमोल ज्ञान देते हैं, साथ ही उनमें धर्म के प्रति श्रद्धा भी बढाते हैं । धर्म की शाश्वत शिक्षा देनेवाली इस ग्रंथसंपत्ति को ज्ञानदान का सर्वाेत्तम माध्यम कहा जा सकता है । अतः आप अक्षय तृतीया के दिन ऐसे ग्रंथदान के द्वारा ज्ञानदान कर पुण्यसंचय सहित आध्यात्मिक लाभ भी उठाएं । ग्रंथदान के माध्यम से अध्यात्मप्रसार हेतु ये ग्रंथ अपने परिजन, विद्यालय-महाविद्यालय के ग्रंथालय, साथ ही सार्वजनिक वाचनालयों को दिए जा सकते हैं । सनातन के ग्रंथ एवं लघुग्रंथ खरीदने हेतु Sanatanshop.com का जालस्थल देखें ।

अक्षय तृतीया के उपलक्ष्य में दान देने के इच्छुक दाता अपनी जानकारी भेजें ।

नाम एवं संपर्क क्रमांक : श्रीमती भाग्यश्री सावंत – 7058885610

संगणकीय पता : [email protected]

डाक पता : श्रीमती भाग्यश्री सावंत, द्वारा ‘सनातन आश्रम’, २४/बी, रामनाथी, बांदिवडे, फोंडा, गोवा. पिन – ४०३४०१

जालस्थल:  https://www.sanatan.org/en/donate पर भी दान (अर्पण) देने की सुविधा उपलब्ध है ।’

– श्री. वीरेंद्र मराठे, प्रबंधकीय न्यासी, सनातन संस्था.  (३.३.२०२६)