
नई दिल्ली – ‘मेटा’ संस्था की वर्ष २०२६ की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत विश्व में साइबर अपराध (धोखाधडी ) के लिए सर्वाधिक लक्ष्य बनने वाले देशों में से एक है । इसमें मुख्य रूप से ‘एआई’ (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग करके व्यापक स्तर पर घोटाले होते दिखाई दे रहे हैं ।
एआई के माध्यम से होने वाले घोटालों को पहचानना अत्यंत कठिन
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर घोटालों के अंतर्गत सामाजिक माध्यमों का बडे स्तर पर दुरुपयोग किया जा रहा है । उसके साथ ही संगठित आपराधिक गुट व्यवसाय की भांति घोटाले कर रहे हैं । एआई की सहायता से मिथ्या वार्तालाप, ई-मेल तथा संकेतस्थल (वेबसाइट) निर्मित किए जा रहे हैं । साथ ही विभिन्न भाषाओं में सहजता से रोक लगने के संदेश सिद्ध किए जाने लगे हैं । इसी के साथ पूर्णतः कपटपूर्ण व्यावसायिक तंत्र प्रयोग करके लोगों को ठगा जाता है । इसी कारण अब एआई के माध्यम से होने वाले घोटालों को पहचानना अत्यंत कठिन होने लगा है ।
विदेश से हो रहे हैं साइबर घोटाले
रिपोर्ट में ‘न्युडीफाय ऐप्स’ नामक एआई के विषय में गंभीर चेतावनी दी गई है । इन ऐप्स के द्वारा किसी का भी बनावटी अश्लील छायाचित्र अथवा वीडियो सरलता से बनाया जा सकता है । ‘डीपफेक’ (एआई के उपयोग से निर्मित ऐसा बनावटी छायाचित्र, वीडियो अथवा स्वर, जो सत्य प्रतीत होता है; परंतु वास्तव में मिथ्या होता है ।) तकनीक के कारण साइबर अपराधों का स्वरूप अधिक भयावह हो गया है । मेटा की जांच में यह भी पाया गया कि कुछ साइबर ऑपरेशन्स ईरान, पाकिस्तान, रूस तथा चीन जैसे देशों से संबंधित नेटवर्क के माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं ।
एआई आधारित रोक हेतु नये नियम बनाना आवश्यक
विशेषज्ञों के मतानुसार, इस संदर्भ में केवल कठोर नियमों से कार्य सिद्ध नहीं होगा, अपितु इसके लिए सभी में डिजिटल साक्षरता बढाना अत्यावश्यक है । केवल यहीं रुकना पर्याप्त नहीं होगा, अपितु एआई आधारित अपराध को रोकने हेतु नया विधान (कानून) बनाना भी अब उतना ही आवश्यक हो गया है ।
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