शिकायत के ४ महीने पश्चात भी रेलवे प्रशासन का केवल औपचारिक उत्तर !

रेलवे में अघोरी बाबा के विज्ञापन लगाने का प्रकरण

जलगांव – राज्य में अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून लागू होने के पश्चात रेलगाडियों में ‘गुरु अरशद जी’ के नाम से अघोरी बाबा के सैकडों विज्ञापन लगाए गए हैं । इनके माध्यम से वशीकरण (किसी को अपने प्रभाव में लाना), प्रेम विवाह कराना, विवाह तोडना , मूठ-करणी आदि अनेक दावे किए गए थे । इन विज्ञापनों में संपर्क क्रमांक भी दिए गए हैं । इस माध्यम से खुले रुप से अपराधजन्य कृत्यों एवं अंधविश्वास को बढावा दिया जा रहा है । इस विषय में नवंबर २०२५ में एक जागरूक नागरिक ने रेलवे विभाग में शिकायत की थी ; लेकिन रेलवे प्रशासन को जागने में ४ महीने का समय लग गया । मार्च २०२६ में उन्होंने ‘उचित संज्ञान लिया जाएगा’, ऐसा पत्र भेजा ।

अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून के अनुसार इस प्रकार के विज्ञापन प्रकाशित करना या उनका प्रचार करना एक संगीन अपराध है । इसके पश्चात रेलवे परिसर में होने वाली इन घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं की जा रही है । (कानून के अनुसार कठोर कार्यवाही कब होगी ? अन्य समय हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं के विषय को अंधविश्वास बताने वाले लोग ढोंगी बाबाओं के संदर्भ में कार्यवाही के लिए आगे नहीं आते ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

४ महीने पश्चात भी यदि रेलवे प्रशासन केवल औपचारिक उत्तर दे रहा है, तो सामान्य लोगों की शिकायतों को वे किस प्रकार से लेते होंगे, इसका विचार भी न किया जाए तो ही अच्छा है !