महाराष्ट्र की जनता एवं मुंबईकरों से अपील !
मुंबई शहर की सुरक्षा एवं जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर टिप्पणी करनेवाला एक विस्तृत अवलोकन स्वरूप में लेख यहां प्रस्तुत है । इसमें भाजपा विधायक प्रसाद लाड द्वारा उठाए प्रश्नों एवं मुंबई की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण किया गया है ।

१. भाजपा विधायक प्रसाद लाड की आक्रामक भूमिका
१२ फरवरी २०२६ को राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं मुंबई शहर के पालकमंत्री एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में ‘मुंबई शहर जिला नियोजन समिति’ की बैठक संपन्न हुई । इस बैठक में विधायक प्रसाद लाड ने मुंबई में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा अत्यंत आक्रामक रूप से उठाया ।
अ. अतिक्रमण की जानकारी : पूर्व द्रुतगति मार्ग पर बांग्लादेशी घुसपैठियों ने कहां और कैसे अतिक्रमण किया है, इसकी विस्तृत जानकारी उन्होंने प्रशासन को दी ।
आ. निष्कासन की मांग : इन घुसपैठियों को मुंबई से बाहर निकालने के लिए तत्काल कठोर कदम उठाने की मांग उन्होंने की है ।
२. पुलिस की कार्रवाई : निर्वासित घुसपैठिए पुनः मुंबई में

मुंबई पुलिस ने हाल ही में २ बांग्लादेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया, जिन्हें पिछले अगस्त में ही भारत से निर्वासित किया गया था ।
अ. झुलेखा शेख : गेटवे ऑफ इंडिया क्षेत्र से इस बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया गया । पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि सीमा पार कर वह पुनः भारत आई एवं कामाठीपुरा क्षेत्र में रहने लगी ।
आ. बिल्किस बेगम : कफ परेड क्षेत्र से इसे गिरफ्तार किया गया । इसके पास बांग्लादेश का राष्ट्रीय पहचान पत्र मिला । वह भारत में किराए के घर में रह रही थी ।
इ. गंभीर प्रश्न : इन दोनों के पास वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं था । उन्हें सीमा पार करने में किसने सहायता की ? तथा मुंबई में कौन-सा गिरोह सक्रिय है ? इसकी जांच पुलिस कर रही है ।
३. ‘हॉकर्स जिहाद’ एवं मराठी व्यवसायियों पर संकट
मुंबई की आर्थिक नाडी पर कब्जा पाने के लिए एक नया षड्यंत्र रचा जा रहा है, ऐसा दृश्य सामने आ रहा है । इसे ‘हॉकर्स जिहाद’ कहा जा रहा है ।

४. मालाड-मालवणी का ‘मालवणी पैटर्न’
मुंबई उपनगर के मालाड-मालवणी क्षेत्र में स्थिति अत्यंत चिंताजनक बताई जा रही है । यहां राजनीतिक स्वार्थ के लिए ‘मालवणी पैटर्न’ लागू किए जाने का आरोप है ।
अ. फर्जी मतदान : अवैध आधार कार्ड और राशन कार्ड के आधार पर घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची में जोडे जा रहे हैं । पिछले कुछ महीनों में यहां २६ हजार मतदाताओं की संदिग्ध वृद्धि हुई है ।
आ. आंगनवाडियों पर कब्जा : मालवणी की २८ आंगनवाडियों पर अतिक्रमण कर वहां मांस बिक्री की अवैध दुकानें बन गई हैं ।
इ. नशीले पदार्थों का जाल : इन बस्तियों में नशीले पदार्थों का कारोबार फैल रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है ।
५. प्रशासनिक कदम एवं आगे की दिशा
मुंबई में अनुमानित १५ हजार एकड भूमि पर अतिक्रमण हुआ है, जिसमें से ५ हजार एकड भूमि केंद्र सरकार की है ।
अ. भूमि मुक्ति अभियान : पिछले एक वर्ष में २६ हजार वर्ग मीटर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया गया है ।
आ. विधायक पहल : ५०० एकड खाली भूमि का सर्वे कर वहां खेल मैदान, पुस्तकालय एवं व्यायाम शाला बनाने की योजना प्रशासन ने बनाई है ।
इ. नागरिकों से अपील : ‘मुंबई की सुरक्षा एवं अगली पीढी के भविष्य के लिए घुसपैठियों के विरुद्ध सतर्क रहें’, ऐसी अपील की गई है ।
६. मुंबईकरों से अपील : बांग्लादेशी घुसपैठ रोकें !
सभी मुंबईकर भाइयों और मुंबई से प्रेम करनेवालों के लिए यह संदेश है । चुनाव आते-जाते रहते हैं; परंतु मुंबई की सुरक्षा एवं उसका सुव्यवस्थित नियोजन अधिक महत्त्वपूर्ण है । मुंबई में अब अनेक स्थानों पर बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं ने प्रवेश किया है, जिससे सुरक्षा का प्रश्न गंभीर हो गया है । कुछ राजनेता इस घुसपैठ को बढावा देकर अपनी वोट बैंक मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं; परंतु सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विकास पर इसके दूरगामी परिणाम होंगे ।
७. मालवणी पैटर्न : घुसपैठ की उत्पत्ति
मालाड-मालवणी निर्वाचन क्षेत्र में ‘मालवणी पैटर्न’ का उपयोग कर राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है । इस पैटर्न के कारण फर्जी मतदाताओं की संख्या बढी है और ऐसी स्थिति में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों का प्रवेश हुआ है । स्थानीय विधायक के संरक्षण के कारण इस क्षेत्र में बांग्लादेशी गुप्त रूप से रह रहे हैं । उन्हें अवैध आधार कार्ड और राशन कार्ड का उपयोग कर मतदाता सूची में पंजीकरण की अनुमति मिली है ।
८. अतिक्रमण के गंभीर परिणाम
मालवणी क्षेत्र में २८ आंगनवाडियों पर अतिक्रमण कर मांस बिक्री की दुकानें चलाई जा रही हैं । स्थानीय नेताओं के अप्रत्यक्ष सहयोग से नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार चल रहा है, जिससे युवा पीढी नशे की खाई में धकेली जा रही है ।
९. सुरक्षित मुंबई के लिए एकजुट होना आवश्यक है !
बांग्लादेशी और रोहिंग्या के विरोध में बोलने का साहस दिखाना प्रत्येक मुंबईकर का कर्तव्य है । ‘अपमान और धमकियां मिलने पर भी मैं घुसपैठ के विरुद्ध आवाज उठाता रहूंगा’, ऐसी भूमिका अपनानी चाहिए । अपनी अगली पीढी के लिए सुरक्षित मुंबई का निर्माण करना आवश्यक है ।
१०. मुंबई की तटरेखा पर ‘समुद्री घुसपैठ’ का घेरा : सुरक्षा का प्रश्न गंभीर
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सुरक्षा के लिए केवल जमीनी मार्ग ही नहीं, अपितु विशाल समुद्र तट भी बडी चुनौती बनी हुई है ।
२६/११ को हुए भीषण आतंकवादी आक्रमण का घाव (जख्म) अभी भी ताजा है, ऐसे में मुंबई की १४९ किलोमीटर लंबी तटरेखा पर अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा अपना बसेरा बनाने की चौंकानेवाली वास्तविकता सामने आ रही है ।
११. तटीय क्षेत्रों में अनधिकृत बस्तियों का जाल !
मुंबई की सुरक्षा के लिए तटरेखा पर रहनेवाली जनसंख्या का भारतीय और निष्ठावान होना आवश्यक है; परंतु वर्तमान स्थिति के अनुसार दक्षिण मुंबई से लेकर उपनगरों तक अनेक स्थानों पर संदिग्ध बस्तियां खडी कर दी गई हैं ।
अ. अवैध निर्माण : ‘कोस्टल लाइन’ (तटरेखा) पर अनेक छोटी-बडी अनधिकृत दरगाह एवं धार्मिक स्थल बनाए गए हैं । स्थानीय लोगों द्वारा लगाए आरोप के अनुसार, इन स्थानों का उपयोग घुसपैठियों को आश्रय देने एवं उन्हें बसाने के लिए किया जाता है ।
आ. विशिष्ट क्षेत्र : उत्तन, माहिम, वसई एवं डोंगरी किले के पास के क्षेत्रों में घुसपैठियों की जनसंख्या तेजी से बढी है । चेंबूर के चीता कैंप और वर्सोवा-मालवणी जैसे क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर है कि सुरक्षा के कारणों से मूल निवासियों को पलायन करना पड रहा है ।
१२. ‘टाटा इंस्टीट्यूट’ की रिपोर्ट के चौंकानेवाले निष्कर्ष !
‘टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस)’ की एक रिपोर्ट का संदर्भ लें, तो मुंबई में रह रहे लगभग ७० प्रतिशत अवैध प्रवासियों के पास आधार कार्ड जैसे आधिकारिक भारतीय कागदपत्र (दस्तावेज) उपलब्ध हैं । देशभक्त नागरिकों का कहना है कि ‘यह मुंबई की जनसांख्यिकीय संरचना को परिवर्तित कर शहर को दुर्बल (कमजोर) करने का एक नियोजित षड्यंत्र है ।’
१३. पारंपरिक कोली समाज का अस्तित्व संकट में !
इस घुसपैठ का सबसे अधिक प्रभाव मुंबई के मूल भूमिपुत्रों, अर्थात मछुआरा समाज पर पड रहा है ।
अ. सस्ते श्रमिक : स्थानीय व्यवसायियों को बांग्लादेशी श्रमिक कम दरों पर उपलब्ध हो रहे हैं, इसलिए उन्हें जानबूझकर इस क्षेत्र में बसाया जा रहा है ।
आ. व्यवसाय की मर्यादाएं : इसके कारण पारंपरिक कोली भाइयों को अपना पीढीगत व्यवसाय छोडकर अन्य विकल्पों का विचार करना पड रहा है । तटरेखा पर बढते इस अतिक्रमण के कारण मछली बाजार का अर्थशास्त्र भी परिवर्तित हो रहा है । (क्रमश:)
– ब्रिगेडियर हेमंत महाजन (सेवानिवृत्त), पुणे. (१७.२.२०२५)
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