हरियाणा एवं झारखंड में बालसंस्कार वर्ग के माध्यम से आदर्श एवं सुसंस्कारी पीढी का निर्माण

विषय प्रस्तुत करते हुए श्रीमती सरोज गुप्ता

फरीदाबाद (हरियाणा) – फरीदाबाद के सेक्टर २९ स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में सनातन संस्था की ओर से बालक-अभिभावक परिचय समारोह संपन्न हुआ ।

इस समारोह में बच्चों ने सनातन संस्था की ओर से लिए जानेवाले बालसंस्कार वर्ग में, भावार्थ के साथ जो श्लोक, बोधप्रद कहानियां, आध्यात्मिक खेल सिखाए गए थे; उन सबको उन्होंने वहां बडे उत्साह के साथ प्रस्तुत किया । बच्चों के अभिभावकों ने बालसंस्कार वर्ग में भेजने से बच्चों में हुए परिवर्तन का अनुभव बताया । उन्होंने कहा कि संस्था का ये निःशुल्क और निष्काम कार्य बहुत ही प्रशंसनीय है और कुछ अभिभावकों ने अपनी वीडियो बाइट के माध्यम से समाज को संदेश दिया कि सभी अभिभावक संस्था के इस उपक्रम में अपने बच्चों को प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन से जोडें ।

इस समारोह में सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने उपस्थित अभिभावकों और बालकों के लिए ऑनलाइन के माध्यम से मार्गदर्शन किया और उन्होंने बताया कि वर्तमान में तनावमुक्त जीवन जीने के लिए साधना की आवश्यकता है । यदि अभिभावक साधना करेंगे, तो बच्चे भी उनका अनुसरण कर साधनारत रहेंगे और सुसंस्कारी बनेंगे ।

सनातन संस्था के कार्य और आज के काल में बालसंस्कार वर्ग का महत्त्व और उद्देश्य क्या है, इस विषय में सनातन संस्था की ओर से श्रीमती सीमा शर्मा ने जानकारी दी ।

बालकों को संस्कारक्षम बनाने में अभिभावकों की भूमिका कैसी होनी चाहिए, इस पर सनातन संस्था की ओर से श्रीमती तृप्ति जोशी ने जानकारी दी ।

फरीदाबाद जिले में हो रहे प्रत्यक्ष बालसंस्कार वर्ग के वैशिष्ट्यपूर्ण प्रयास और बच्चों में हुए परिवर्तन के विषय में सनातन संस्था की श्रीमती सरोज गुप्ता ने जानकारी दी; जैसे जन्मदिन हिन्दू संस्कृति के अनुसार कैसे मनाएं । बच्चों ने उसे सीखकर आचरण में लाया, जिससे माता पिता को भी इस शास्त्र की जानकारी मिली ।

बालसंस्कार वर्ग में बच्चों ने टी.वी., मोबाइल के दुष्परिणामों को समझकर उस समय का सदुपयोग उन्होंने चिकनी मिट्टी (clay) से देवी-देवताओं की मूर्तियां और चित्र बनाने में किया । ५० अभिभावक व बच्चों ने इस समारोह का लाभ लिया ।

क्षणिकाएं

१. इस समारोह में आए एक जिज्ञासु को यह बालक अभिभावक समारोह बहुत अच्छा लगा और उन्होंने कहा कि ‘सनातन संस्था का यह समारोह एक व्यासपीठ है, जहां आकर बच्चे सुसंस्कारी बन रहे हैं, साथ ही उन्होंने अपनी सोसायटी में बालसंस्कार वर्ग आयोजित करने की मांग की ।

२. इस समारोह में आई एक महिला जिज्ञासु को यह समारोह बहुत अच्छा लगा और उन्होंने अपनी नातिन को बालसंस्कार वर्ग में भेजने की बात कही ।


धनबाद में वसंत पंचमी के पावन अवसर पर बच्चों के लिए विशेष बालसंस्कार वर्ग का आयोजन ।

धनबाद (झारखंड) –  वसंत पंचमी के पावन अवसर पर धनबाद के ‘जीवन ज्योति विद्यालय’ तथा कतरास के ‘रानी बाजार’ क्षेत्र में बच्चों के लिए विशेष बालसंस्कार वर्ग का आयोजन किया गया ।

धनबाद में प्रवचन देते हुए श्रीमती गीता दलाल ने बताया कि माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी से ऋतुओं के राजा ‘ऋतुराज बसंत’ का आरंभ होता है । यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का प्रतीक है । इस दिन मां सरस्वती के पूजन का विशेष महत्त्व है । उन्होंने बच्चों को बताया कि प्रतिदिन अध्ययन से पूर्व मां सरस्वती की प्रार्थना कैसे करनी चाहिए ! उन्होंने बच्चों को प्रार्थना का महत्त्व भी समझाया !

मां सरस्वती से प्रार्थना करते बच्चे

प्रवचन में यह भी बताया गया कि यदि किसी कारणवश श्री सरस्वती देवी धन, रूप एवं बल के अभिमान से रुष्ट हो जाएं, तो व्यक्ति में ज्ञानार्जन की इच्छा नष्ट एवं लुप्त हो जाती है । अनेक प्रयत्नों के उपरांत भी हम विद्या एवं कला प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं । अतः विद्या का अपमान न हो, इसके लिए हमें कौन-कौन सावधानियां रखनी चाहिए, इस विषय पर भी विस्तृत जानकारी दी गई ।


सनातन संस्था की बही का बच्चों में वितरण

कतरास (रानी बाजार) में श्रीमती पिंकी केशरी एवं श्रीमती गायत्री केशरी ने यह विशेष बालसंस्कार वर्ग लिया । इन प्रवचनों में विषय बताने के साथ-साथ बच्चों में सनातन संस्था की बही का वितरण भी किया गया ।


ऑनलाइन बालसंस्कार वर्ग का आयोजन

इस अवसर पर वसंत पंचमी विशेष ऑनलाइन बालसंस्कार वर्ग का भी आयोजन किया गया था । सत्संग का विषय सुनकर अनेक बच्चों ने मां सरस्वती की प्रार्थना किस प्रकार की जाए, इस पर वीडियो बाइट बनाकर दी । सोशल मीडिया के माध्यम से उसका प्रसार किया गया ।

अनेक अभिभावकों ने इन प्रवचनों की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में भक्तिभाव एवं संस्कार विकसित होते हैं ।’