Vaishno Devi Medical College : जम्मू स्थित श्री वैष्णोदेवी चिकित्सा महाविद्यालय को एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति रद्द ।

५० आसनों में से ४२ आसन मुसलमान विद्यार्थियों को मिलने के कारण विरोध हो रहा था ।

जम्मू (जम्मू-कश्मीर) — कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस महाविद्यालय को एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम चलाने की दी गई अनुमति रद्द करने का निर्णय लिया गया है । यह कदम २ जनवरी २०२६ को की गई अनायास निरीक्षण प्रतिवेदन के उपरांत उठाया गया । इस निरीक्षण में शिक्षण व्यवस्था, आधारभूत संरचना, रोगी संख्या एवं वैद्यकीय सुविधाओं में गंभीर न्यूनताएं पाई गई । मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने सूचित कि यह महाविद्यालय न्यूनतम मानकों को पूरा नहीं कर पा रहा है, एवं नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष की स्वीकृति के उपरांत मान्यता रद्द कर दी गई ।

५० में से ४२ विद्यार्थी मुसलमान — विवाद बढा

महाविद्यालय के एम.बी.बी.एस. पाठ्यक्रम के ५० विद्यार्थियों में से ४२ विद्यार्थी कश्मीरी मुसलमान होने की जानकारी उजागर होने के उपरांत विवाद उत्पन्न हुआ । भाजपा एवं कुछ हिन्दू संगठनों ने प्रश्न उठाया -“मंदिर के निधि से चलने वाली संस्था में मुसलमान छात्रों को प्रवेश कैसे मिला ?” तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सभी प्रवेश राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट) एवं योग्यता सूची के अनुसार हुए हैं, धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हुआ । उन्होंने यह भी स्पष्ट किया – “यदि संस्थान को अल्पसंख्यक मान्यता चाहिए थी, तो समय रहते मांग करनी चाहिए थी ।”

जाँच में गंभीर न्यूनताएं उजागर

मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने प्राप्त आरोपों की पुष्टि के लिए २ जनवरी २०२६ को निरीक्षण किया । इसमें पाया गया कि शिक्षण कर्मीयों की ३९ प्रतिशत की कमी थी । शिक्षक (ट्यूटर), प्रात्यक्षिक कर्ता (डेमॉन्स्ट्रेटर) एवं वरिष्ठ निवासी डॉक्टर (सीनियर रेसिडेंट डॉक्टर) की संख्या लगभग ६५ प्रतिशत न्यून थी । रोगियों की संख्या एवं उपचार सुविधाएं भी अपेक्षाओं से अत्यंत न्यून थीं । बाह्य रुग्ण सेवा में अपेक्षित ४०० रोगियों की जगह केवल १८२ रुग्ण थे, प्रविष्ट रोगियों की संख्या ८० प्रतिशत अपेक्षित के स्थान पर ४५ प्रतिशत थी, एवं अतिदक्षता (आई.सी.यू.) विभाग में आधी ही खाटें (बेड) भरी थीं । इसके अतिरिक्त प्रति माह प्रसव की संख्या केवल २५ प्रविष्ट हो रही थी ।

संपादकीय भूमिका 

इस निर्णय से हिन्दू विद्यार्थियों के साथ ही अन्याय हुआ है । हिन्दू मंदिरों के धन से चलने वाले महाविद्यालय में हिन्दुओं को मुसलमानों के कारण शिक्षा न मिल सके — यह अत्यंत लज्जाजनक है !