Grok AI Notice : ‘ग्रोक एआई’ द्वारा ‘एक्स’ खाते पर सार्वजनिक रूप से प्रसारित किए जा रहे हैं महिलाओं के अश्लील चित्र

  • उपयोगकर्ता महिलाओं के अच्छे चित्र देकर मांग रहे हैं अश्लील चित्र !

  • वैश्विक स्तर पर आक्रोश की लहर !

नई देहली – वर्तमान में एआई का युग है एवं लगभग प्रत्येक व्यक्ति उसका किसी न किसी प्रकार से प्रयोग करते हुए दिखाई दे रहा है । तथापि उसके सामाजिक रूप से भयावह एवं अनियंत्रित परिणाम भी सम्मुख आए हैं । ‘एक्स’ का ‘एआई चैटबॉट’ (संगणकीय प्रणाली) ‘ग्रोक’ महिलाओं के अश्लील चित्र अनियंत्रित रूप से प्रसारित कर रहा है । लोग किसी महिला का व्यवस्थित वेशभूषावाला चित्र देकर ‘ग्रोक’ से कह रहे हैं कि ‘महिला को अल्प वस्त्र पहनाकर चित्र प्रसारित करो’ । ग्रोक भी इस प्रकार से अधिक उत्तेजक एवं अश्लील वस्त्रोंवाले चित्र सामाजिक माध्यमों पर सीधे सबके सम्मुख प्रसारित कर रहा है । विशेष यह है कि ये प्रतिमाएं अत्यंत वास्तविक दिखाई देती हैं । यदि कोई उपयोगकर्ता चित्र की महिला की भाव-भंगिमा को लैंगिक अथवा कामुक करने के लिए कहता है, तो ‘ग्रोक’ वह विनती भी पूर्ण कर रहा है । इससे वैश्विक स्तर पर ‘ग्रोक’ एवं ‘एक्स’ के स्वामी इलॉन मस्क के विरुद्ध आक्रोश की लहर उमड पडी है ।

सामान्यतः ‘एआई चैटबॉट्स’ निजी वातावरण में कार्य करते हैं । इसका अर्थ है कि यदि किसी उपयोगकर्ता ने एआई माध्यम से कोई प्रश्न पूछा, तो उसका उत्तर उस उपयोगकर्ता तक ही सीमित रहता है । परंतु ‘ग्रोक’ अनियंत्रित रूप से कार्य कर रहा है, ऐसा सम्मुख आया है । ‘ग्रोक’ से जब यह पूछा गया कि वह इस प्रकार का कुकृत्य क्यों कर रहा है ?, तब उसने कहा कि इलॉन मस्क ने ‘ग्रोक’ को प्रतियोगियों की तुलना में अल्प प्रतिबंधोंवाला एक ‘स्पाइसी’ एआई माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया है ।
विवरण

‘ग्रोक’ कर रहा है शारीरिक गोपनीयता पर सीधा आक्रमण, दंडनीय अपराध ! – अधिवक्त्या अमिता सचदेवा

इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने कहा है कि, यह प्रवृत्ति भयावह, अवैध एवं भारत के डिजिटल सुरक्षा ढांचे का उल्लंघन है । ऐसे चित्र संबंधित व्यक्तियों की अनुमति के बिना प्रसारित करना उनकी शारीरिक गोपनीयता पर सीधा आक्रमण है । ‘सूचना तकनीक अधिनियम, २०००’ की धारा ६६ ई के अंतर्गत जब किसी व्यक्ति के निजी अंगों की प्रतिमाएं सहमति के बिना ली जाती हैं, प्रकाशित की जाती हैं अथवा प्रसारित की जाती हैं, तब गोपनीयता का उल्लंघन एक दंडनीय अपराध ठहरता है । सचदेवा ने आगे कहा कि, ऐसे ‘एआई एडिट्स’ (एआई का प्रयोग कर चित्र परिवर्तित करना) का प्रयोग कर स्त्रियों को बार-बार लक्ष्य बनाने पर भारतीय दंड संहिता की धारा ‘३५४ डी’ के अंतर्गत कार्यवाही हो सकती है ।

संपादकीय भूमिका 

  • एआई, अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिस प्रकार सकारात्मक एवं रचनात्मक प्रयोग किया जा रहा है, वैसे ही उसके दुष्परिणाम भी बार-बार सम्मुख आ रहे हैं । यह धर्मविहीन तकनीक का ही परिणाम है, इसे जानें !
  • ऐसी घटनाएं मानव समूह के नैतिक अध:पतन की परिचायक हैं, इसे ध्यान में रखें !