
लक्ष्मणपुरी (लखनऊ, उत्तर प्रदेश) – पूर्व समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के कार्यकाल में पारित किया गया वह विधेयक, जो मदरसा शिक्षकों को किसी भी कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान करता था, वर्तमान योगी आदित्यनाथ सरकार ने वापस ले लिया है । इस विधेयक में संविधान की पूरी तरह अनदेखी की गई थी तथा मदरसों को असीमित अधिकार दिए गए थे ।
१. मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि वर्ष २००६ में ‘उत्तर प्रदेश मदरसा अध्यापक एवं अन्य कर्मचारी वेतन विधेयक’ पारित किया गया था ।
२. इस विधेयक के अनुसार, मदरसे के किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के विरुद्ध कोई जांच या अभियोग प्रविष्ट नहीं किया जा सकता था । इसके अतिरिक्त, यदि वेतन देने में देरी होती, तो संबंधित सरकारी अधिकारियों को दंडित करने का प्रावधान भी इस विधेयक में रखा गया था ।
३. सपा सरकार के समय दोनों सदनों (विधानसभा एवं विधान परिषद) से अनुमति (मंजूरी) मिलने के उपरांत तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने इस विधेयक पर गंभीर आपत्ति जताई थी तथा इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया था ।
४. राज्यपाल ने स्पष्ट किया था कि यह विधेयक संवैधानिक ढांचे के अनुरूप नहीं है । इसी कारण सपा सरकार के कार्यकाल में यह विधेयक लागू नहीं हो सका था ।
५. वर्ष २०१७ में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार आने के पश्चात राष्ट्रपति ने यह विधेयक वापस भेज दिया । विधेयक में कई त्रुटियां होने के कारण केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि वे संविधान की परिधि में रहने वाला नया विधेयक लाएं ।
६. अब राज्य मंत्रिमंडल ने इस पुराने तथा विवादित विधेयक को वापस लेने के प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से अनुमति दे दी है ।
संपादकीय भूमिकाजब मदरसों में कई बार जिहादी, आतंकवादी एवं बलात्कारी पकडे जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, ऐसे में उन्हें असीमित अधिकार देने वाले ‘राष्ट्रघाती’ (राष्ट्रविरोधी) मानसिकता के हैं, ऐसा कहना क्या अनुचित होगा ?
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