देहली सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव

भारत मंडपम्, देहली : वर्तमान समय में शहरी नक्सलवाद, अलगाववादी, साथ ही भारतविरोधी घटक देश को अस्थिर बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं । ‘वोकिजम’ को (पूरे विश्व में प्रस्थापित समाजव्यवस्था, संस्कृति एवं परिवारव्यवस्था को छेद देनेवाली विकृति को) गति देना, विकृत मनोरंजन, धर्मनिरपेक्षतावाद के नाम पर सज्जनों का दमन, भाषावाद, ‘जेन जी’ को (वर्ष १९९६ से वर्ष २०१० की अवधि में जन्मी पीढी को) झूठा उत्तेजन’ जैसे माध्यमों से गो-गंगा-गायत्री, वेद-पुराण-ज्ञानभण्डार, मंदिर-संस्कृति-संस्कार आदि सनातन के आस्था केंद्रों को लक्ष्य बनाया जा रहा है । ‘टैरिफ वॉर’ (व्यापार युद्ध) जैसे माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को दबाने का प्रयास हो रहा है । ऐसी स्थिति में शूर भारतीय सैनिक रणभूमि में अपने शौर्य का परिचय देकर भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखेंगे; परंतु एक संस्कृतिनिष्ठ नागरिक के रूप में हमें भी मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर भी शौर्यजागरण करने का समय अब आ चुका है, ऐसे जाज्वल्य विचार सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव के व्यासपीठ से बोलते हुए व्यक्त किए ।
श्री. वर्तक ने कहा,
‘‘भारतियों का मनोबल बढाने हेतु तथा शत्रु का मनोबल गिराने हेतु मानसिक शौर्य आवश्यक है, साथ ही भारत एक तपोभूमि है, अतः आध्यात्मिक शौर्य जागरण हेतु हमें साधना का बल भी बढाना होगा । ‘संस्कृति विहीन’ भारत स्वयं को अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रख सकेगा’, इसे ध्यान में रखते हुए वर्तमान समय में सनातन राष्ट्र के इस दहकते यज्ञकुंड में समिधा के रूप में समर्पित होने की आवश्यकता है ।’’
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