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टोकियो (जापान) – जापान सरकार ने देश में मुसलमानों के लिए अलग शमशानभूमि बनाने के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से मना कर दिया है । सरकार ने कहा कि ‘यह निर्णय जापानी परंपरा और रूढियों के अनुरूप है’ । संसद की सदस्या मिजुहो उमेमुरा ने सुझाव दिया कि ‘जापान में मृतदेह का अग्नि-संस्कार करने की पद्धति है । मुसलमान समुदाय को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए ऐसा करना चाहिए कि जब किसी मुसलमान की मृत्यु हो, तो उसके मृतदेह को उसके मूल देश भेजकर वहां दफन किया जाए’ ।
🇯🇵 Japan Rejects Demand for a Separate Muslim Cemetery
➡️ Cites lack of land availability
➡️ Advises Muslim community to send bodies to home countries for burial
Japan chose a firm, practical stand instead of appeasement. 🇯🇵💯
With India’s population rising fast, even burial… pic.twitter.com/kCgl2GTrhn
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) December 1, 2025
१. कब्रिस्तान न बनाने का निर्णय जापान की पुरानी सांस्कृतिक मान्यताओं को प्राथमिकता देने वाली नीति का भाग है । देश में बौद्ध और शिंतो परंपराओं का प्रभाव होने के कारण अग्नि-संस्कार ही मुख्य अंतिम संस्कार पद्धति है ।
२. जापान में ९९ प्रतिशत से अधिक लोग अपने परिजन की मृत्यु होने पर अग्नि-संस्कार ही करते हैं ।
३. शहरी क्षेत्रों में भूमि की अत्यधिक कमी के कारण बडी संख्या मे कब्रिस्तान बनाना कठिन और संवेदनशील विषय बन गया है ।
४. इस निर्णय से जापान में रहने वाले अनिवासी मुसलमान तथा जापानी नागरिकता प्राप्त मुसलमान प्रभावित होंगे । उनकी धार्मिक परंपरा के अनुसार मृतदेह का अंतिम संस्कार (दफन) करना अनिवार्य होता है । इसलिए अब उन्हें मृत मुसलमान का मृतदेह उसके मूल देश भेजना पडेगा ।
संपादकीय भूमिकादेश में मुसलमान समुदाय को प्रसन्न करने के स्थान पर जापान सरकार ने ऐसा कठोर निर्णय लिया है, इससे भारत को भी सीख लेनी चाहिए । भारत में भी जनसंख्या के विस्फोट के कारण मृत मुसलमानों के अंतिम संस्कार (दफनाने) के लिए भूमि की कमी दिखाई दे रही है । भविष्य में भारत को भी ऐसी समस्या पर कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता आएगी । |
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