नई दिल्ली – दिल्ली बम विस्फोट प्रकरण में बंदी बनाए गए डॉ. शाहीन सईद एवं डॉ. मुजम्मिल ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि उन्होंने बम बनाने के लिए अल-फलाह विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला से रसायन चुराए थे । दूसरी ओर, ‘ईडी’ (प्रवर्तन निदेशालय) के दल ने मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने की प्रक्रिया) के प्रकरण में अल-फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद सिद्दीकी के घर पर छापा मारकर उन्हें बंदी बना लिया है ।
आत्मघाती बम विस्फोट करने वाले तैयार करने का प्रयास
बम विस्फोट में मारा गया डॉ. उमर आत्मघाती बम विस्फोट करने वालों का एक दल (स्क्वाड) बनाने का प्रयास कर रहा था । वह ऐसे लोगों को प्रशिक्षण देने का प्रयास कर रहा था । वह मुस्लिम युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए उनके लिए ‘प्रेरणादायक’ वीडियो बनाकर भेज रहा था । ये वीडियो ११ व्यक्तियों को भेजे गए थे । उनमें से ७ कश्मीरी थे तथा वे सभी किसी न किसी प्रकार से अल-फलाह विश्वविद्यालय से जुडे हुए थे । शेष ४ लोग उत्तर प्रदेश, कर्नाटक तथा केरल राज्यों के बताए जाते हैं ।
जिस कश्मीरी व्यक्ति ने डॉ. उमर को ‘आई२०’ चार पहिया गाडी दी थी, उसने आत्मघाती बम विस्फोट करने वाला बनना अस्वीकार कर दिया था । उसके पश्चात उसे ये वीडियो भेजे गए । उमर आत्मघाती आक्रमण करने वालों का एक दल बना रहा था ।
७० वीडियो की जांच की गई है । उनमें से १२ वीडियो डॉ. उमर ने स्वयं फिल्माए थे । ये वीडियो सुशिक्षित युवाओं को भेजे गए थे, जिन्हें वह ‘मानव बम’ के रूप में तैयार करने का प्रयास कर रहा था ।

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