Giriraj Singh : हमें कृतघ्न (नमकहरामों) के मत (वोट) नहीं चाहिए !

भाजपा के नेता तथा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का धर्मांध मुसलमानों के विषय में कथन !

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह

पटलीपुत्र (बिहार) – जो किसी के उपकार को नहीं मानता, उसे क्या कहा जाता है ? ‘नमकहराम’ कहा जाता है । मौलवी साहब, हमें नमकहरामों के मत नहीं चाहिए — ऐसा कथन केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा के नेता गिरिराज सिंह ने अरवाल में चुनाव प्रचारसभा में किया । इस प्रचारसभा में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल भी उपस्थित थे ।
गिरिराज सिंह ने कहा कि मैंने मौलवियों से पूछा, ‘आयुष्मान कार्ड (केंद्र सरकार की वैद्यकीय सुविधा देनेवाला कार्ड) मिला क्या ?’ उन्होंने कहा ‘हां’ मिला । मैंने पूछा, ‘हिन्दू–मुसलमान भेदभाव हुआ क्या ?’ उन्होंने कहा, ‘नहीं।’ तब मैंने पूछा, ‘अच्छा हुआ, क्या तुमने हमें मत दिया था ?’ उन्होंने कहा, ‘दिया था।’ मैंने कहा, ‘अल्ला का नाम लेकर कहो’, तो उन्होंने कहा, ‘नहीं दिया था।’ (झूठे मौलवी ! – संपादक) तब मैंने उनसे कहा, ‘क्या नरेंद्र मोदी अथवा हमने कोई अपशब्द कहे थे ?’ तो उन्होंने कहा, ‘नहीं।’ तब मैंने कहा, ‘हमें नमकहरामों के मत नहीं चाहिए।’

नितीश कुमार की पार्टी ने किया निषेध !

गिरिराज सिंह के कथन पर मित्रपक्ष ‘संयुक्त जनता दल’ ने अप्रसन्नता व्यक्त की । पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार इस सभा में उपस्थित थे । उन्होंने कहा कि गिरिराज सिंह का कथन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के विपरीत है । ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’, ऐसा मोदी जी ने कहा था । (अब भाजपा द्वारा इस प्रकार की घोषणाएं देना बंद हो गया है, यह ध्यान में रखना चाहिए ! – संपादक) बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने भी मुसलमानों के मतों के लिए नहीं, अपितु सर्वसमावेशिता के लिए कार्य किया है । (उसका ‘फल’ उन्हें आगामी चुनाव में मिलेगा, तो आश्चर्य क्या ? – संपादक)

(और इनकी सुनिए…) ‘गिरिराज सिंह को मंत्रीपद से हटाया जाए !’ – राजद

लालू प्रसाद यादव की ‘राष्ट्रीय जनता दल’ ने गिरिराज सिंह के निष्काषन की मांग की है । पार्टी के प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता ने कहा कि गिरिराज सिंह जैसे व्यक्तियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तत्काल मंत्रिमंडल से निकाल देना चाहिए; किन्तु वे ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि भाजपा की राजनीति मुख्यतः द्वेष पर आधारित है । अतः गिरिराज सिंह जैसे व्यक्ति मतों के ध्रुवीकरण के लिए इस प्रकार के उकसानेवाले कथन करते हैं । (जातीय राजनीति एवं भ्रष्टाचार करनेवाले अन्य पर इस प्रकार के आरोप लगाएं, यह हास्यास्पद है ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका 

‘धर्मांध मुसलमान भाजपा को मत नहीं देते तथा न ही देंगे’, यह सर्वविदित होते हुए भाजपा को उनके स्थान पर हिन्दुओं के लिए ठोस कार्य करना आवश्यक है — ऐसा ही हिन्दुओं को प्रतीत होता है !