तमिलनाडू की द्रमुक सरकार का हिन्दीद्वेष
चेन्नई – तमिलनाडऊ में हिन्दी भाषा के प्रचार पर अंकुश लगाने हेतु वहां की द्रमुक सरकार एक विधेयक लेकर आई है । यह विधेयक यदि पारित होकर उसका कानून में रूपांतरण हुआ, तो तमिलनाडू राज्य में हिन्दी गानों, फिल्मों एव हिन्दी विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगेगा ।
१. द्रमुक की सरकार का यह कहना है कि यह निर्णय तमिल भाषा एवं राज्य की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए आवश्यक है ।
२. इस विधेयक के मसौदे के विषय में चर्चा करने हेतु सरकार ने विशेषज्ञों के साथ आपातकालीन बैठक की थी । द्रमुक की सरकार के अनुसार यह निर्णय केंद्र सरकार की ओर से हम पर हिन्दी भाषा थोपने का जो प्रयास किया जा रहा है, उसके विरोध में चलाए जानेवाले द्रविडी आंदोलन की ऐतिहासिकता को बल देनेवाला है ।
३. द्रमुक के वरिष्ठ नेता टी.के.एस्. इलंगोवन ने बताया, ‘हम संविधान के विरुद्ध कुछ भी नहीं करेंगे । हम संविधान का पालन करते हैं । हमारा विरोध हिन्दी भाषा को थोपे जाने के लिए है, हिन्दी भाषा को नहीं है ।’
४. भाजपा ने द्रमुक की सरकार के इस निर्णय की कडी आलोचना की है । भाजपा नेता विनोज सेल्वम ने इस निर्णय को ‘अविचारी’ बताकर उसकी आलोचना की । उन्होंने कहा कि भाषा का उपयोग राजनीतिक साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए । द्रमुक की सरकार विभिन्न न्यायालयीन प्रकरणों में उसे मिली असफलता से ध्यान हटाने के लिए तथा अन्य विवादों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे भावनात्मक विषयों को आगे ला रही है ।
संपादकीय भूमिकास्वयं का राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए ऐसे निर्णय लेकर तमिल जनता में हिन्दी के प्रति द्वेष उत्पन्न करनेवाली द्रमुक की सरकार ! ऐसे विभाजनवादी प्रवृत्ति की सरकारें कैसे समाजहित साधेंगे ? |

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