आज, २ अक्टूबर को लालबहादुर शास्त्रीजी की जयंती है । इस अवसर पर सबका विनम्र अभिवादन !
एक बैठक में पाकिस्तान के झुल्फिकार अली भूट्टो कहते हैं, ‘घास-फूस खानेवाले हिन्दू किस योग्य हैं, जो हमारा सामना कर सकेंगे । वह भी शास्त्री, वह तो एक दुर्बल प्रधानमंत्री है ।’ राष्ट्रपति अयुब
खान ने पूछा’, क्या भारत ने अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन किया ? भारत आक्रमण कर सकता है ?’ सेना के सभी कमांडर हंसने लगे । ‘अमेरिका हमारे साथ है, यदि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा लांघ दी, तो दिल्ली भी हाथ से निकल जाएगी’, इस विचार से पाकिस्तान ने सन १९६५ में नियंत्रण रेखा का उल्लंघन करके ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ शुरु किया । ‘पैटन’ रंगारे से अखनूर सेक्टर में भीषण विध्वंस किया था । उस समय भारत के पास अधिक शस्त्रास्त्र नहीं थे ।
लश्कर प्रमुख जनरल जयंती नाथ चौधरी ने वेस्टर्न कमांडर जनरल हरबख्श सिंह को अमृतसर से अखनूर के लिए सेना भेजने के आदेश दिए । हरबख्श सिंह ने ऐसा करना अस्वीकार कर दिया ।
जनरल हरबख्श सिंह का कहना था कि प्रधान मंत्री से बात की जाए । जनरल चौधरी आधी रात को प्रधानमंत्री से मिलने गए तथा उन्होंने उनसे कहा, ‘हम कश्मीर गंवा देंगे’ इस पर शास्त्रीजी ने पूछा ‘हमें क्या करना चाहिए ?’ जनरल चौधरी ने कहा, ‘वेस्टर्न कमांडर हरबख्श सिंह कहते हैं, ‘हम अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करेंगे; परंतु इससे बहुत बडा युद्ध होगा । अमेरिका पाकिस्तान का साथ देगा । हमें अखनूर के लिए अधिक सैनिक भेजना होगा ।’ शास्त्रीजी ने कहा ‘कश्मीर को बचाने के लिए भारत सबकुछ करेगा । जनरल हरबख्श सिंह का कहना उचित है । आप अंतर्राष्ट्रीय सीमा को लांघ कर लाहौर पर आक्रमण कीजिए । ‘ शास्त्रीजी ने बिना मंत्रीमंडल की बैठक बुलाए तथा ‘प्रोटोकोल ‘(राजशिष्टाचार) के बिना ही यह लिखित आदेश दिया था ।
दूसरे दिन सवेरे ६ बजे वेस्टर्न कमांडर जनरल हरबख्श सिंह के नेतृत्व में भारतीय सेना ने लाहौर पर आक्रमण किया । संपूर्ण विश्व विस्मित हो गया ।पाकिस्तान ने तो घुटने ही टेक दिए । हरबख्श सिंह की पुस्तक ‘इन द लाईन ऑफ ड्युटी’ में इस संदर्भ में उन्होंने संपूर्ण विवरण लिखा है । आगे चलकर हरबख्श सिंह को ‘पद्मभूषण’, ‘पद्मश्री’, ‘वीरचक्र’ आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया ।
घास फूस खानेवाले छोटे कद के शास्त्रीजी के निर्णय ने दिखा दिया, ‘शौर्य किसे कहते हैं ?’
– रमेश बनकर, एक राष्ट्रप्रेमी

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