(सी.डी.एस्. अर्थात् ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ । सेना, नौसेना तथा वायुसैन्य – इन तीनों का संयुक्त प्रमुख जिसे यह पद प्रदान होता है, उसे सी.डी.एस्. कहा जाता है ।)

नई दिल्ली – भविष्य में अणु तथा जैविक आक्रमणों के विरुद्ध सजग रहना आवश्यक है, ऐसा मत सी.डी.एस्. जनरल अनिल चौहान ने यहां व्यक्त किया । नई दिल्ली के माणेकशॉ केंद्र में सैन्य नर्सिंग सेवा के १०० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रहे थे ।
जनरल अनिल चौहान ने आगे कहा – ‘‘आज की सूचना-केंद्रित युद्ध की कालावधि में चिकित्सकीय सूचना को विशेष महत्त्व है । भारतीयों का ‘डी.एन.ए.’ (‘डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड’, अर्थात् व्यक्ति की मूल पहचान निर्धारित करनेवाले शरीर के घटक । जिनसे जनुकीय घटक (जेनेटिक मटेरियल) निर्मित होते हैं, वे अणु ‘डी.एन.ए.’ कहलाते हैं ।) अत्यंत विशिष्ट है । वातावरण तथा संक्रमण के अनुसार हमारी प्रतिकारशक्ति विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं देती है । अतः व्यक्तिगत चिकित्सकीय सूचना का संरक्षण महत्त्वपूर्ण होता है । इसमें रोग-इतिहास, परीक्षण तथा आरोग्य-संबंधी अभिलेख सम्मिलित हैं ।
सैन्य में कार्यवाही से संबंध सूचना, स्वास्थ्य-पद्धति के अनुसार नियुक्तियां तथा स्थानान्तरण योजनाएं – इनका गुप्त रहना आवश्यक है । सूचना एवं संरक्षण की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी ‘सैन्य नर्सिंग सेवा’ की न होकर भी, इन चुनौतियों के प्रति जागरूकता आवश्यक है । हमारे नर्सिंग प्रशिक्षण में भविष्य की चुनौतियों का विचार किया जाना चाहिए । भविष्य में जैविक संकट बढ़ने की संभावना है । किरणोत्सर्गीय संकटों के विरोध में पृथक् उपचार-पद्धतियों की आवश्यकता होती है एवं वह हमारे प्रशिक्षण का भाग होना चाहिए ।’’
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