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लेह (लद्दाख) – यहां पिछले कुछ दिनों से चल रहे हिंसक आंदोलन में हाल ही में पुलिस पर आक्रमण करने की घटना में २ नेपाली नागरिकों को बंदी बनाया गया है । इसी के साथ ही भडकाऊ भाषण देने वाले पर्यावरणविद एवं नेता सोनम वांगचुक को २६ सितंबर की दोपहर को बंदी बनाया गया । लेह के आंदोलन की तुलना उन्होंने नेपाल के “जेन-जी ” आंदोलन से की थी । इस घटना में अब तक लगभग ६० लोगों को बंदी बनाया जा चुका है । आंदोलन में नेपाली लोगों की भागीदारी सामने आने के बाद इस हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ होने की बात सामने आई है ।
वांगचुक के एनजीओ की विदेशी फंडिंग की अनुमति समाप्त
१. २५ सितंबर को उनके एनजीओ के विदेशी योगदान (नियमन) अधिनियम (FCRA) के अंतर्गत विदेशी फंडिंग की अनुमति समाप्त कर दी गई ।
२. २४ सितंबर को वांगचुक ने आंदोलन वापस लेते हुए कहा था कि लेह का यह आंदोलन “जेन-जी क्रांति” है, क्योंकि व्यवसाय न होना तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के छिन जाने से युवा आक्रोशित हैं ।
आंदोलन में हुआ था हिंसाचार
आंदोलन के चलते बढती हिंसा को रोकने के लिए पुलिस की गोलीबारी में ४ लोगों की मृत्यु हो गई, कम से कम ५० लोग घायल हो गए । प्रदर्शनकारियों ने लेह में भाजपा कार्यालय में भी आग लगा दी थी । “लद्दाख को राज्य की श्रेणी में रखा जाए ” इस मांग को लेकर पिछले ३५ दिनों से अनशन कर रहे वांगचुक ने २४ सितंबर को अपना अनशन समाप्त कर दिया था ।
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