हिन्दू देवताओं के प्रति द्वेष रखने का मुसलमान बानू मुश्ताक का इतिहास

बेंगलुरु (कर्नाटक) – इस वर्ष बुकर पुरस्कार प्राप्त करने वाली हिन्दू-द्वेषी लेखिका बानू मुश्ताक के द्वारा विश्वविख्यात मैसूरु दशहरा उत्सव का उद्घाटन होगा, ऐसी घोषणा कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने हाल ही में की । उस पर से राज्यभर के हिन्दू नेताओं की ओर से विरोध प्रकट किया जा रहा है ।
“देवी की पूजा करना बानू मुश्ताक के धार्मिक विश्वास के विरुद्ध है” – विधायक बसनगौडा पाटील यत्नाळ

मैं व्यक्तिगत रूप से बानू मुश्ताक का लेखिका ईवा कार्यकर्ता के रूप में आदर करता हूं; परन्तु चामुण्डेश्वरी देवी को पुष्प अर्पित करके एवं दीप प्रज्वलित कर दशहरा उत्सव का उद्घाटन करना उनके अपने ही धार्मिक विश्वास के विरुद्ध है, ऐसा वक्तव्य विधायक बसनगौडा पाटील यत्नाळ ने किया ।
“दशहरा यह धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक नहीं, अपितु एक धार्मिक विधि है” – भारतीय जनता पार्टी के भूतपूर्व सांसद प्रताप सिम्हा

बानू मुश्ताक के साहित्य के प्रति मुझे आदर है; किन्तु दशहरा यह धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक नहीं है । दशहरा शत-प्रतिशत धार्मिक विधि है । माता चामुण्डेश्वरी की पूजा कर दशहरा आरम्भ होता है । बानू मुश्ताक को माता चामुण्डेश्वरी पर विश्वास है या नहीं, यह उन्हें बताना चाहिए । धार्मिक विश्वास का विरोध करने वालों को मुख्यमंत्री क्यों बुलाते हैं, ऐसा भी खेद सिम्हा ने व्यक्त किया ।
सिम्हा ने आगे कहा कि इस्लाम मूर्तिपूजा का तिरस्कार करता है एवं केवल एक देव तथा एक ग्रंथ मानता है । इस विश्वास पर बानू मुश्ताक आज भी स्थिर हैं या उन्हें यह लगता है कि ‘सर्व मार्ग अन्ततः एक ही मुक्ति की ओर जाते हैं’ ?
संपादकीय भूमिका
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बानू मुश्ताक का हिन्दू-द्वेष !वर्ष २०२३ में हुए ‘जन साहित्य सम्मेलन’ कार्यक्रम में बानू मुश्ताक का हिन्दू-द्वेष स्पष्ट हुआ था । उन्होंने कहा था कि – “तुम लोगों ने कन्नड भाषा को ‘कन्नड भुवनेश्वरी’ बना दिया है । केसरिया एवं पीला, हल्दी-कुमकुम का ध्वज लगाकर, हल्दी-कुमकुम लगाकर भुवनेश्वरी को सिंहासन पर बिठा दिया है । मैं कहां खड़ी होऊं ? मैं क्या देखुं ? मैं कहां सहभागी होऊं ? मुझे बाहर निकालने की प्रक्रिया आज से नहीं, बल्कि बहुत पूर्व से चल रही थी । वह आज पूर्ण हुई है ।” (ऐसी हिन्दू-द्वेषी महिला को दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करना अत्यन्त दुखद है । – संपादक) |

प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ नेता चक्रवर्ती सुलीबेले ने खेद व्यक्त किया कि – “कन्नड भुवनेश्वरी को सहन न कर सकने वाले चामुण्डेश्वरी माता के वैभव के सम्मुख नतमस्तक होने को तैयार होंगे क्या ?”
“सरकार हिन्दुओं की भावनाएं आहत कर रही है !” – प्रमोद मुतालिक

मैसूरु दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए बानू मुश्ताक का चयन यह राज्य सरकार दे रही लालच एवं मतपेटी की राजनीति है । इसका श्रीराम सेना निषेध करती है । चामुण्डेश्वरी हिन्दुओं का आराध्य देवी है । ऐसी स्थिति में मुसलमान महिला का मैसूरु दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए चयन करना निन्दनीय है । कांग्रेस सरकार हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएं आहत करने का प्रयास कर रही है ।
(और इनकी सुनिए) “एक धर्म को अलग रखकर दशहरा मनाना सम्भव है क्या ?” – गृहमंत्री जी. परमेश्वर

हिन्दुत्वनिष्ठों के विरोध पर राज्य के गृहमन्त्री जी. परमेश्वर ने कहा कि दशहरा एक प्रादेशिक पर्व है । वह किसी भी जाति या धर्म तक सीमित नहीं है । एक धर्म को अलग रखकर दशहरा मनाना सम्भव है क्या ? मिर्जा इस्माईल ने दीवान के रूप में दशहरा नहीं मनाया था क्या ? निस्सार अहमद ने दशहरा का उद्घाटन नहीं किया था क्या ? इस पर आक्षेप नहीं लेना चाहिए । (पूर्व में किसी ने आक्षेप नहीं लिया, इसलिए अब भी न लेना चाहिए, ऐसा परमेश्वर को लगता है क्या ? – संपादक)
संपादकीय भूमिका
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(और इनकी सुनिए) “बानू मुश्ताक को निमन्त्रण न देना चाहिए, ऐसा संविधान में कहां लिखा है ?” – कांग्रेस मंत्री संतोष लाड

बानू मुश्ताक को निमन्त्रण देने पर हुए विरोध को कांग्रेस मंत्री संतोष लाड ने अस्वीकार किया । वे बोले कि दशहरा के उद्घाटन के लिए बानू मुश्ताक को निमन्त्रण नहीं देना चाहिए, ऐसा संविधान में कहां लिखा है ? भारतीय जनता पार्टी प्रत्येक विषय को धर्म की दृष्टि से विरोध करती है । (कांग्रेस ने धर्म की दृष्टि से ही हिन्दुओं को आतंकवादी एवं मुसलमानों को निरपराध ठहराने का अब तक भरपूर प्रयास किया है, यह ध्यान दीजिए ! – संपादक)
लाड ने आगे कहा कि, देश में सर्वाधिक दान किसने दिया है ? अजीम प्रेमजी ने दरिद्रों के कल्याण के लिए लाखों करोड रुपये दिए हैं । उनके योगदान को स्वीकार करने से पूर्व क्या हम उनके धर्म के विषय में प्रश्न पूछते हैं ? इस प्रकार बुद्धिभ्रम करने का लाड ने प्रयास किया । (देश में सर्वाधिक कर हिन्दू भरते हैं तथा अधिकाधिक शासकीय सुविधाएं मुसलमानों को मिलती हैं, यह वस्तुस्थिति है ! – संपादक)
संपादकीय भूमिका
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