कर्नल श्रीकांत पुरोहित की पत्नी द्वारा आतंकवाद विरोधी दल का वास्तविक स्वरूप उजागर !

मुंबई – मेरे पति कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को आतंकवाद विरोधी दल ने अवैध रूप से बंदी बनाकर उनकी मालेगांव विस्फोट की नहीं, अपितु जाकिर नाइक, नकली मुद्रा तंत्र, दाऊद इब्राहीम तथा पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था आई॰एस॰आई॰ के प्रतिवेदनों के विषय में पूछताछ की थी । कर्नल पुरोहित ‘सेना गुप्तचर विभाग’ (आर्मी इण्टेलिजेंस) में होने के कारण वर्ष २००५ से २००७ के काल में उपर्युक्त विषयों पर प्रतिवेदन तैयार कर चुके थे । इस कारण दल के अधिकारियों ने उनसे इन प्रतिवेदनों के स्रोत के विषय में पूछताछ की, ऐसी चौंकाने वाली सूचना कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित की पत्नी सौ अपर्णा पुरोहित ने दी । एक समाचार पत्र के प्रतिनिधि ने सौ॰ अपर्णा का साक्षात्कार लिया तब उन्होंने ये वक्तव्य दिया । मालेगांव विस्फोट प्रकरण में कर्नल पुरोहित को निर्दोष मुक्त कर दिया गया है ।
इस साक्षात्कार में सौ अपर्णा पुरोहित द्वारा प्रस्तुत चौंकाने वाला वास्तविक स्वरूप :
१. कर्नल ने वर्ष २००८ में एक गुप्त अभियान चलाया था । उसके पश्चात उनके विरुद्ध षड्यन्त्र रचकर उन्हें ‘थर्ड डिग्री टॉर्चर’ किया गया । मारपीट के कारण उनका घुटना टूट गया था ।
२. २९ अक्तूबर २००८ को कर्नल को अवैध रूप से ले जाया गया था । उनको बंदी बनाने के विषय में मेरे सहित उनके वरिष्ठ अधिकारियों तथा सेना को कोई भी सूचना नहीं थी । हम सभी को अंधकार में रखा गया था । ०४ नवम्बर को मुझसे संपर्क कर बताया गया कि कर्नल पुरोहित को नियंत्रण में लिया गया है, आप नासिक न्यायालय में आयें । मध्यप्रदेश के पचमढ़ी से उसी दिन नासिक पहुंचना सम्भव न होने से मैं उनसे मिल नहीं सकी ।
३. कर्नल पुरोहित पर शारीरिक अत्याचार किया गया । इस विषय में हमने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी ।
४. मालेगांव विस्फोट के षड्यंत्र में उनका सहभाग था, यह स्वीकारने के लिये उन पर दबाव डाला जा रहा था ।

५. अन्वेषण के समय कर्नल पुरोहित एवं एक सुबेदार ने साक्ष्य दिया कि उन्होंने शेखर बागडे नामक आतंकवाद विरोधी दल के अधिकारी को आर॰डी॰एक्स॰ रखते हुए देखा था । इस कारण कर्नल पर आर डी एक्स एकत्र करने का आरोप निरस्त करने में यह साक्ष्य उपयोगी सिद्ध हुआ । शेखर बागडे की इस प्रकरण में जांच होनी चाहिये थी । यह सब क्यों किया गया ?, इसकी जांच आवश्यक थी ।
संपादकीय भूमिकामालेगांव विस्फोट के निर्णय के उपरान्त सर्व स्तरों पर उजागर हो रहे पुलिस के चौंकाने वाले वास्तविक स्वरूप के संदर्भ में शासन को संबंधितों की जांच कर सत्य समाज के समक्ष लाना चाहिये तथा दोषी पुलिस अधिकारियों को आजीवन कारागार में डालना चाहिये ! |
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