Pawan Kalyan Slams ‘Fake Secularists’ : ईसाईयों एवं मुसलमानों को धर्म की स्वतंत्रता है; किन्तु हिन्दुओं को नहीं !

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण का वक्तव्य !

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण

मदुरै (तमिलनाडु) – ईसाइयों को ईसाई बने रहने की स्वतंत्रता है एवं मुसलमानों को मुसलमान बने रहने की स्वतंत्रता है; किन्तु जब कोई हिन्दू अपने धर्म के संबंध में अपने विचार व्यक्त करता है, तब उसे ‘धार्मिक कट्टरपंथी’ कहा जाता है। यह मिथ्या धर्मनिरपेक्षता है, ऐसा आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा। वे यहां हिन्दू मुन्नानी (हिन्दू मोर्चा) संगठन द्वारा आयोजित ‘मुरुगा भक्तरागल मनडु’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस अवसर पर भाजपा नेता के. अन्नामलाई, अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कडगम दल के कार्यकर्ता एवं बडी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। पवन कल्याण ने ‘कांड षष्ठी कवचम्’ जैसे पवित्र भजनों का हास्य उडाने पर दुख व्यक्त किया । उन्होंने सभी से एकजुट होकर सामूहिक रूप से हिन्दू धर्म की रक्षा करने का आवाहन किया।

पवन कल्याण ने आगे कहा,

१. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू देवी-देवताओं को लक्ष्य किया जा रहा है !

धर्मनिरपेक्षता का तात्पर्य सभी धर्मों के लिए समान व्यवहार होना चाहिए; किन्तु इन दिनों अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू देवी-देवताओं को बार-बार लक्ष्य किया जा रहा है, जो एक गंभीर समस्या है।

२. ‘धर्मनिरपेक्षता’ एवं ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ शब्द कुछ लोगों के लिए शस्त्र हैं !

यदि इस प्रवृत्ति को प्रतिबंधित नहीं किया गया तो हमारे धर्म एवं आस्था को संरक्षित करना कठिन हो जाएगा। ‘धर्मनिरपेक्षता’ एवं ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ जैसे शब्द कुछ लोगों के लिए सुविधाजनक शस्त्र बन गए हैं।

३. हिंदुओं के संयम को उनकी निर्बलता नहीं समझना चाहिए !

हिन्दुओं के संयम को उनकी निर्बलता नहीं समझना चाहिए। यदि आप मेरी आस्था का सम्मान नहीं कर सकते तो कम से कम उसका अपमान तो न करें।

४. मेरी आस्था का भी सम्मान होना चाहिए !

मैं कट्टरपंथी नहीं हूं। मैं एक समर्पित हिन्दू हूं। मैं ईसाई धर्म एवं इस्लाम का सम्मान करता हूं एवं मेरी आस्था का भी सम्मान होना चाहिए।

५. तमिलनाडु की हिन्दू परिषदों में उठाए गए विषय अत्यंत गंभीर हैं एवं समाज में अनावश्यक विभाजन निर्माण कर रहे हैं।

संपादकीय भूमिका

पवन कल्याण ने सत्य उजागर किया है। इसे दृष्टि में रखते हुए प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ शासकों को हिन्दू विरोधियों पर ध्यान देना चाहिए !